राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति दिलाते हैं भारत के ये 6 प्रसिद्ध मंदिर!
भारत में राहु और केतु के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए समर्पित 6 महत्वपूर्ण मंदिर है। इन मंदिरों में भक्त ग्रह दोषों से मुक्ति पाने और आध्यात्मिक शा ...और पढ़ें

राहु-केतु से जुड़े 6 प्रसिद्ध मंदिर (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिषीय विज्ञान में राहु और केतु भी उतनी ही महत्वपूर्ण ग्रह हैं, जितने की अन्य सभी ग्रह। राहु और केतु को जीवन में अचानक होने वाले बदलाव, कर्मों का सबक और भ्रम के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है, फिर भी उन्हें आध्यात्मिक विकास और आत्म साक्षात्कार की ओर बढ़ने वाली शक्तिशाली ताकतों के रूप में पूजा जाता है।
देशभर में राहु और केतु से जुड़े 6 ऐसे मंदिर हैं, जहां भक्त इन स्थानों पर आकर अपने ग्रहीय प्रभावों को कम करने के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

श्री कालहस्तीश्वर मंदिर
आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के श्रीकालहस्तीश्वर में स्थित है श्रीकालहस्ती मंदिर देश के सबसे पूजनीय शैव तीर्थों में शामिल है। यहां भगवान शिव को कालहस्तीश्वर के रूप में पूजा जाता है, जो वायु का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस मंदिर को राहु-केतु क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है, जिस वजह से स्थानीय लोग इसे दक्षिण कैलाशम कहा जाता है। मान्यता है कि, इस मंदिर में दर्शन करने से राहु-केतु से जुड़े अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
तिरुनागेश्वरम नागनाथर मंदिर
तमिलनाडु में स्थित तिरुनागेश्वर नागनाथर मंदिर जिसे राहु स्थलम के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर तमिलनाडु के कुंभकोणम के नजदीक स्थित एक पूजनीय शिव मंदिर है। स्थानीय लोग यहां शिव को नागनाथ और उनकी पत्नी पार्वती को पिरैसूदी अम्मन के रूप में पूजते हैं।
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यह नवग्रह स्थलों में शामिल राहु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। मंदिर में चार गोपुरम, कई मंदिर और जटिल रूप से बने हॉल है, जिनमें सबसे आकर्षक नायक काल में बना भव्य अलंकृत हॉल शामिल है।
श्री नागनाथस्वामी केथु मंदिर
तमिलनाडु के कीझापेरुमपल्लम में स्थित केतु स्थलम मंदिर जो भगवान शिव को नागनाथ स्वामी के रूप में समर्पित है। इस मंदिर में एक साधारण,समतल राजगोपुरम और दो प्राकारम हैं।
रोजाना सुबह 6 बजे से रात 8.30 बजे तक दिन में 4 बार पूजा की जाती है, जबकि भक्त अक्सर महाशिवरात्रि पर दर्शन करने आते हैं।

राहु केतु मंदिर
तेलंगाना में राहु-केतु मंदिर अपने शांत वातावरण के लिए काफी प्रसिद्ध है। देशभर से श्रद्धालु यहां पर राहु-केतु के प्रभावों से होने वाली समस्याओं के निदान के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। मंदिर का शांत वातावरण इसे इन छाया ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव से राहत पाने आए लोगों को आध्यात्मिक रूप से खास स्थान प्रदान करता है।

श्री नीलकंडेश्वर मंदिर
चेन्नई के गेरुगमबक्कम में स्थित श्री नीलकंडेश्वर मंदिर, जहां भगवान शिव को नीलकंडेश्वरार के रूप में पूजा जाता है, जबकि पार्वती माता की पूजा कामाक्षी के रूप में की जाती है। मंदिर में केतु को समर्पित एक मंदिर भी है, जहां खासतौर से केतु से जुड़ी कर्मिक कठिनाइयों से छुटकारा पाने के लिए भक्त धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
राहु मंदिर- उत्तराखंड
उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों के बीच में बसा है, राहु को समर्पित मंदिर जो अपने अनुष्ठानिक महत्व और खुले वातावरण के लिए काफी प्रसिद्ध है। इस शांत और सौम्य वातावरण में भक्त ध्यान का अभ्यास करते हैं और राहु से जुड़े दोषों को कम करने के लिए अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हैं।
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