क्या मध्य प्रदेश के 'चौसठ योगिनी मंदिर' से प्रेरित है भारतीय संसद का डिजाइन? पढ़ें इससे जुड़ी पौराणिक कथा
मध्य प्रदेश का प्राचीन चौसठ योगिनी मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी तुलना अक्सर भारतीय संसद भवन से की जाती है। ...और पढ़ें
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चौसठ योगिनी मंदिर (मध्य प्रदेश)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के भिंड मुरैना क्षेत्र में स्थित प्राचीन चौसठ योगिनी मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर 11वीं शताब्दी का बताया जाता है। इस मंदिर का डिजाइन काफी हद तक देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित संसद भवन से काफी मिलता-जुलता है।
अक्सर लोगों के बीच यह बहस होती है कि, भारतीय संसद भवन का डिजाइन इस मंदिर से काफी हद तक मेल खाता है। लेकिन क्या सच में भारतीय संसद के डिजाइनरों ने चौसठ योगिनी मंदिर से प्रेरणा ली थी? आइए जानते हैं इसके पीछे का सच।
चौसठ योगिनी मंदिर का इतिहास
mptourism बेवसाइट के अनुसार, भले ही चौसठ योगिनी मंदिर देखने में प्रसिद्ध इमारत भारतीय संसद भवन की याद दिलाता हो, लेकिन इस बात कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि, भारतीय संसद भवन के डिजाइनर एडविन लुटियंस ने कभी इस मंदिर को देखा था। बटेश्वर मंदिर परिसर और पदावली किले के साथ चौसठ योगिनी मंदिर उन प्रमुख तीन स्थल हैं।
चौसठ योगिनी मंदिर पहाड़ी पर स्थित है और 170 फुट का त्रिज्या वाला वृत्ताकार (circular with radius) भवन है। जहां भारतीय संसद भवन का डिजाइन सर एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने मिलकर तैयार किया था। वहीं चौसठ योगिनी शिव मंदिर को कच्छपघाटा के राजा देवपाल ने बनवाया था। कहा जाता है कि, यह मंदिर चौसठ योगिनी को समर्पित है, जिसके भीतर 64 छोटे-छोटे कमरे हैं। मंदिर का केंद्र भाग भगवान शिव को समर्पित है। इतिहास के मुताबिक, मंदिर की बाहरी सतह पर युगल और युवतियों की प्रतिमाएं थीं, जिसमें से अधिकतर खो गई या छतिग्रस्त हो गईं हैं।
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चौसठ योगिनी मंदिर और भारतीय संसद भवन के बीच में समानताएं साफ-साफ हैं। हालांकि साक्ष्यों की कमी के वजह से इतिहासका और पुरातत्वविद अभी भी संशय में हैं। भारतीय संसद भवन के वास्तुकला को लेकर एक मत यह भी है कि, संसद भवन जैसी एक अन्य ऐसी इमारतें रोमन वास्तुकला से प्रेरित हैं, जबकि दूसरे मत में यह कहा जाता है कि संसद भवन का निर्माण भारतीय और पश्चिमी वास्तुकला का मिश्रण हैं। चौसठ योगिनी मंदिर मध्य प्रदेश के मीताओली गांव में बसा है।

चौसठ योगिनी मंदिर (AI Image)
चौसठ योगिनी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार रक्तबीज नामक राक्षस जब भगवान शिव के वरदान से अजेय हो गया था। रक्त बीज को वरदान मिला था कि, यदि कोई उसे मार डाले तो उसके खून की हर एक बूंद से सैकड़ों राक्षस संतानें उतपन्न होंगी। यह वरदान कुछ समय तक रक्तबीज के लिए कारगर भी साबित हुआ, लेकिन एक युद्ध में मां दुर्गा ने 64 योगिनियों (स्त्रियों) को भेजा, जिन्हें रक्त बीज का रक्त भूमि पर गिरने से पहले ही उसे पी लिया।
परिणामस्वरूप रक्त बीज का अंत हुआ और चौसठ योगिनियों का पंथ अस्तित्व में आया। इन योगिनियों को जादूगरनियों के रूप में देखा जाता है. इसलिए कभी-कभी इनसे डरा भी जाता है। लेकिन जो लोग इनकी पूजा करते थे उन्होंने ने ही 64 योगिनियों का मंदिर बनवाया। ये मंदिर देशभर में हैं। वर्तमान समय में तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों में भी हैं।
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Source- mptourism
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