Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    तेलंगाना का रहस्यमयी मंदिर: जहां पत्थर की मूर्ति को दबाने पर निकलने लगता है खून!

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 04:00 PM (IST)

    तेलंगाना के वारंगल में स्थित 4000 साल पुराना हेमचला लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर अपनी रहस्यमयी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भगवान नरसिम्ह ...और पढ़ें

    हेमचला लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर

    हेमचला लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत के तेलंगाना के वारंगल जिले के मल्लूर में स्थित है, हेमचला लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी का मंदिर जो 4000 हजार से भी ज्यादा पुराना बताया जाता है। समुद्र तल से करीब 1500 फीट की ऊंचाई पर एक पर्वत की चोटी पर स्थित इस मंदिर में भक्तों को दिव्य प्रतिमा के दर्शन के लिए तकरीबन 150 सीढ़ियां चढ़नी होती है।

    हरे-भरे वातावरण और शांत पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर उन लोगों की पहली पसंद है, जो ध्यान और आध्यात्मिक साधना में रुचि रखते हैं। आइए जानते हैं इस मंदिर की खासयित क्या है?

    हेमचला लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर

    हेमचला लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर 

    मंदिर का मुख्य आकर्षण नरसिम्हा देव जी की मूर्ति

    हेमचला लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी का मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान नरसिम्हा स्वामी की मूर्ति है, जो किसी भी चमत्कार से कम नहीं है। इस प्रतिमा की खास बात इसकी कोमल त्वचा है। माना जाता है कि, इस प्रतिमा को दबाते हैं, तो त्वचा पर लाल निशान बन जाता है, और अगर इसे जोर से दबाते हैं, तो इस मूर्ति में से खून भी निकलने लगता है।

    समय-समय पर खून बहने के कारण मंदिर के पुजारी और पुरोहित लगातार भगवान नरसिम्हा की इस मूर्ति पर चंदन का लेप लगाते हैं, ताकि खून निकलना बंद हो जाए। पौराणिक कथा के मुताबिक, यह प्रतिमा स्वयंभू यानी खुद पाताल से प्रकट हुई है।

    हेमचला लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर

    मंदिर से जुड़ी अहम जानकारी 

    इस मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालु शांति, सुकून और ईश्वरीय आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए आते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि, जो भी भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं, उनके समस्त दुखों का नाश हो जाता है। इसके अलावा भगवान नरसिम्हा निःसंतान दंपतियों पर भी अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं।

    खबरें और भी

    मल्लू में स्थित यह मंदिर उग्र नरसिम्हा स्वामी को समर्पित है, जो भद्राचलम से 90 किमी और वारंगल शहर से करीब 130 किलोमीटर दूर स्थित है। मंदिर से जुड़ी कई विशेषताएं है, जिनमें मूलवीरथ श्री नरसिम्हा स्वामी की तकरीबन 10 फीट ऊंची प्रतिमा शामिल है। इस प्रतिमा का पेट मानव त्वचा जितना कोमल है।

    मंदिर का ध्वजस्तंभ करीब 60 फीट ऊंचा है। मंदिर के पास पहाड़ियों की चोटी से लगातार पानी का प्रवाह होता रहता है। गोदावरी पुष्पकरम के दौरान साल 2003 में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। हर साल अप्रैल से मई के बीच वार्षिक यात्रा का आयोजन किया जाता है।

    यह भी पढ़ें- राजस्थान का अनोखा 'सास-बहू' मंदिर: न सास की पूजा, न बहू की, तो कैसे पड़ा यह नाम?

    यह भी पढ़ें- जब भयंकर सूखे में शिवलिंग से निकली थी जलधारा: मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर का अद्भुत चमत्कार

    Source

    Government of Telangana

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।