हनुमान जी के इस मंदिर में मन्नत पूरी होने पर चढ़ाई जाती हैं चांदी की आंखें, क्या है सालों पुरानी इस परंपरा का रहस्य?
बिहार के दरभंगा स्थित हनुमान मंदिर में मन्नत पूरी होने पर भक्त चांदी की आंखें चढ़ाते हैं। यह अनोखी परंपरा ...और पढ़ें

दरभंगा हनुमान मंदिर का रहस्य: मन्नत पूरी होने पर चढ़ती हैं चांदी की आंखें (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
दरभंगा हनुमान मंदिर में मन्नत पूरी होने पर चांदी की आंखें चढ़ाते हैं।
यह मंदिर 1920 में स्थापित हुआ, जहां राम परिवार भी विराजमान है।
यहां दर्शन से आंखों से जुड़ी समस्याएं ठीक होने की मान्यता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे देश भारत में लाखों ऐसे मंदिर हैं जिनका अपना अनोखा रहस्य है। कोई मंदिर साल में एक बाद खुलता है, तो कोई दिन में एक बार समुद्र में समा जाता है।
किसी मंदिर के लिए कहा जाता है कि वहां आज भी भगवान प्रकट होते हैं, तो किसी में सदियों से अखंड ज्योति प्रज्वलित है। ऐसे कई मंदिरों का एक रहस्य और कहानी है जिससे दुनिया आज भी अनजान है। इन्हीं में से एक मंदिर है बिहार के दरभंगा में स्थित हनुमान मंदिर जो सदियों से भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
इस मंदिर की स्थापना 1920 में हुई थी और इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यहां पहले बजरंगबली और बाद में प्रभु श्रीराम परिवार सहित विराजमान हुए। इस मंदिर के बारे में एक और रहस्य सामने आता है कि इस मंदिर में जब भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं तब वो चांदी की आंखें मंदिर में चढ़ाते हैं। आइए आपको बताते हैं सालों पुराने इस मंदिर का रहस्य क्या है?
कब हुई थी मंदिर की स्थापना
बिहार के दरभंगा में स्थित हनुमान मंदिर के बारे में कहा जाता है कि आज से लगभग 105 साल पहले ये स्थान एकदम वीरान पड़ा था और आस-पास घने जंगल मौजूद थे।
उस समय इस स्थान पर एक स्कूल का निर्माण कराने से पहले कारीगर ने हनुमान जी की प्रतिमा उस स्थान पर स्थापित कर दी जिससे उसका काम सही तरीके से पूरा हो सके। धीरे-धीरे इस मूर्ति के पास साल 1920 में मंदिर का निर्माण किया गया और लोगों को इस मंदिर में दर्शन से मनोकामनाएं पूर्ण होती दिखाई देने लगीं। जैसे ही मंदिर पर लोगों की आस्था बढ़ी उस स्थान पर राम दरवार की स्थापना भी की गई।
मंदिर में चांदी की आंखें चढ़ाने की मान्यता
इस मंदिर की सबसे प्रचलित मान्यता यह है कि जैसे ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वहां लोग चांदी की आंखें चढ़ाते हैं। इस मंदिर के लिए एक मान्यता यह भी है कि यहां दर्शन करने से लोगों की आंखों से जुड़ी बड़ी से बड़ी समस्याएं भी ठीक हो जाती हैं। इस वजह से ही लोग मन्नत पूरी होने के बाद यहां चांदी की आंखें चढ़ाते हैं। इसे लोग हनुमान जी का आशीर्वाद ही मानते हैं।
छोटी सी जगह से हुई थी मंदिर की शुरुआत
ऐसा माना जाता है कि शुरुआत में यह मंदिर सिर्फ 3 फीट की छोटी सी जगह में बना था जो आगे चलकर भक्तों के बीच आस्था का बड़ा केंद्र बन गया। आज भी इस मंदिर में मुख्य रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और लोग मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मंदिर की दीवारों पर अपनी इच्छाएं लिखते हैं। जैसे ही यह मन्नत पूरी होती है लोग हनुमान जी के इस पवित्र मंदिर में या तो किसी निर्माण में सहयोग देते हैं या फिर चांदी की आंखें चढ़ाते हैं।
आज के समय में इस मंदिर में सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश से भक्त मन्नतें मांगने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर हनुमान जी का अशीर्वाद मानकर मंदिर में चांदी की आंखें चढ़ाते हैं।
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