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    ब्रह्मा जी ने यहीं से शुरू किया था सृष्टि निर्माण! कानपुर में है 'धरती की नाभि', अनूठा है यहां का रहस्य

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 07:30 PM (IST)

    ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि निर्माण से जुड़ा कानपुर का यह रहस्यमयी स्थान 'धरती की नाभि' कहलाता है। जानिए इस अनूठे व पौराणिक स्थल का धार्मिक महत्व और इसका ...और पढ़ें

    'धरती की नाभि' को 'ब्रह्म खूंटी' भी कहा जाता है। (Picture Credit- AI Generated)

    'धरती की नाभि' को 'ब्रह्म खूंटी' भी कहा जाता है। (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचना बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट से की।

    2. बिठूर में स्थित यह घाट 'धरती की नाभि' कहलाता है।

    3. यहीं पर मनु और शतरूपा का निर्माण हुआ था।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में यह बात स्पष्ट है कि ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी। मगर इस बात को लेकर काफी मतभेद है कि यह रचना शुरू कहां से हुई थी। अलग-अलग पुराणों में इस विषय को लेकर अलग-अलग बात कही गई है। लेकिन ब्रह्मवैवर्त पुराण के ब्रह्मखंड के प्रथम एवं तृतीय अध्याय में इस बात का साफ-साफ जिक्र मिलता है कि सृष्टि को रचने की शुरुआत कानपुर नगर से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट से की थी। चलिए हम आपको आज इससे जुड़ी कुछ मान्यताएं और कथाओं के बारे में बताते हैं।

    क्‍या है ब्रह्मावर्त घाट का इतिहास?

    ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना से पहले 99 अश्वमेध यज्ञ किए थे। यह यज्ञ बिठूर के एक घाट, जहां गंगा नदी बहती है, वहां किए गए थे। इस बात का जिक्र आपको ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिल जाएगा। पहले इस स्‍थान का नाम ब्रह्मावर्त था मगर बाद में छोटा होते-होते बिठूर पड़ गया।

    बिठूर के इस घाट पर एक ब्रह्म खूंटी है। यह धरती का एक उठा हुआ भाग है और इसमें एक छेद भी है। इसलिए इसे 'धरती की नाभि' कहा गया है। किसी मनुष्य के बनने की शुरुआत भी नाभि से होती है और किसी वस्तु के बनने की शुरुआत भी एक केंद्र बिंदु से होती है। ऐसे में मान्यता है कि 'धरती की नाभि' से ही सृष्टि की रचना की शुरुआत की गई थी।

    यहां है ब्रह्मा जी के पैरों के निशान

    आज भी यहां पर ब्रह्मा जी के पैरों के निशान देखने को मिल सकते हैं। यह एक मंदिर है, जहां शिला पर बड़े से पैरों के निशान हैं, जिनको पौराणिक कथाओं में ब्रह्मा जी का पैर बताया गया है। उनके चरणों की आज भी पूजा होती है। मान्यता है कि सृष्टि की रचना जब हो गई, तब उसमें लोगों की आबादी बढ़ाने के उद्देश्य से ब्रह्मा जी ने एक नर और नारी भी बनाई, जिनको इस सृष्टि में मनुष्यों की जनसंख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। ब्रह्मा जी ने यहीं पर मनु और शतरूपा को बनाया था। यही पृथ्वी के प्रथम स्‍त्री और पुरुष माने गए, जिनकी 5 संताने थीं और इन्‍हीं से फिर यह संसार आगे बढ़ा।

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    अतः माना जाता है कि कानपुर नगर के नजदीक बिठूर में विश्व का केंद्र बिंदु है। इस स्थान को बहुत ही पवित्र माना गया है और कई धार्मिक पुराणों में इसका जिक्र भी मिलता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।