हरिद्वार का वह गुप्त मंदिर, जहां स्थित है गौरी कुंड जल ग्रहण करने से होती है यह इच्छा पूरी
हरिद्वार के बिल्केश्वर महादेव मंदिर में स्थित गौरी कुंड का जल संतान प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता ...और पढ़ें
-1783072164647_m.webp)
गौरी कुंड का खास मंदिर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
हरिद्वार जिसे लोग हरि का द्वार भी कहते हैं यहां पर बहती पवित्र गंगा नदी जो वहां का वातावरण ही बदल देती है। हरिद्वार में गंगा किनारे कई सारे ऐसे मंदिर हैं, जहां के दर्शन करके लोगों के कष्टों का निवारण होता है। हरिद्वार का प्रसिद्ध बिल्केश्वर महादेव मंदिर भी इनमें से एक है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में मौजूद गौरी कुंड का जल ग्रहण करने से संतान की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही अन्य कष्टों का निवारण भी इस कुंड के पानी से हो सकता है।
गौरी कुंड का क्या है आध्यात्मिक महत्व?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गौरी कुंड का सीधा संबंध माता पार्वती से है। जिन्हें गौरी भी कहा जाता है। इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को पाने के लिए माता पार्वती ने इसी जगह पर तपस्या की थी। यहीं पर एक कुंड स्थित है, जहां से वह जल ग्रहण किया करती थी। इसी लिए इसे गौरी कुंड कहा जानें लगा। इस कुंड को दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है। कुंड को माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त है, जिन्हें सृजन की देवी भी कहते हैं।
संतान प्राप्ति के लिए करें जल ग्रहण
अगर संतान प्राप्ति में किसी तरह की दिक्कतें आ रही हैं, तो आप गौरी कुंड के जल को जरूर ग्रहण कर सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भी दंपति साथ में इस जल को ग्रहण करता है, उसे मां गौरी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसकी गोद भर जाती है। इसलिए यही वजह है कि भक्तों के बीच गहरी आस्था है। इस बात का खास ध्यान रखें कि यह जल को आप मंदिर में ही ग्रहण कर सकते हैं इसे बाहर किसी भी पात्र में नहीं लेकर जानें दिया जाता।
![[image] - 5563128](https://smart-cms-bkd-static-media.jnm.digital/jagran-hindi/images/2026/07/03/template/image/[image]---5563128-1783072448505.webp)
गौरी कुंड की पूजा और दर्शन
गौरी कुंड के दर्शन से पहले श्रद्धालु को भगवान शिव के दर्शन करने होते हैं। भगवान शिव यहां पर बेलपत्र के पेड़ के नीचे विराजमान हैं। इसके बाद गौरी कुंड के दर्शन प्राप्त होते हैं। यहां पर आप माता को चढ़ाने के लिए लाल चुनरी, श्रृंगार की सामग्री और पुष्प लेकर जाएं। इसे चढ़ाएं अपनी मन की कामना को रखें और इस पवित्र जल को ग्रहण करें। इससे आपको मन को शांति मिलती है। अगर आप हरिद्वार जा रहे हैं, तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करें। आपकी सभी इच्छाओं का निवारण आपको मिल जाएगा।
यह भी पढ़ें- भारत के वो प्रसिद्ध मंदिर जहां 'पैसा' चढ़ाना सख्त मना है, नहीं मिलेगी एक भी दानपेटी
यह भी पढ़ें- क्यों शिवजी की शादी में असंतुलित हो गई थी धरती और कैसे बची दुनिया?
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
Image credit- AI
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।