यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 23, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Janmashtami पर बांके बिहारी मंदिर में भक्त इस समय कर सकेंगे दर्शन, जानिए पूरे कार्यक्रम का शेड्यूल
जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मथुरा वृंदावन के मंदिरों की छटा निराली होती है। इन मंदिरों के जन्माष्टमी महोत्सव में भाग लेने के लिए भारत के कोने-कोने से लो ...और पढ़ें

HighLights
- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी पर मनाई जाती है जन्माष्टमी।
- वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में उमड़ती है भक्तों की भीड़।
- भारत के कोने-कोने से दर्शन के लिए पहुंचते हैं भक्त।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा का विधान है। देशभर के मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन श्रीकृष्ण की नगरी यानी मथुरा, वृंदावन में इसकी एक अलग धूम देखने को मिलती है।
बांके बिहारी मंदिर जन्माष्टमी (Janmashtami Banke Bihari Temple Schedule)
जहां अन्य शहरों में जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जा रही है, वहीं बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा। बांके बिहारी मंदिर के जन्माष्टमी कार्यक्रम की समय सारणी कुछ इस प्रकार रहने वाली है -

- सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 12 बजे तक मंदिर के पट खुलेंगे।
- शृंगार आरती सुबह 9 बजे की जाएगी।
- राजभोग आरती सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगी
- दोपहर 12 बजे कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
- फिर शाम 5 बजकर 30 मिनट से 9 बजकर 30 पर तक कपाट खोले जाएंगे।
- 06 बजकर 30 मिनट पर बांके बिहारी जी की ग्वाल आरती की जाएगी।
- 7 बजकर 30 मिनट पर संध्या आरती की जाएगी।
- मध्य रात्रि 01 बजकर 45 मिनट पर मंगल आरती की जाएगी।
- 28 अगस्त को सुबह 07 बजकर 45 मिनट से 12 बजे तक नंदोत्सव मनाया जाएगा।
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मंदिर की खासियत
इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को पर्दे में रखा जाता है। हर थोड़ी देर पर दर्शन के लिए बांके बिहारी जी की मूर्ति के सामने से पर्दा हटाया जाता है और फिर लगा दिया जाता है। जिसे लेकर यह कहा जाता है कि एक बार जब एक भक्त भगवान के दर्शन के लिए मंदिर आया तो वह एक टक बांके बिहारी जी की मूर्ति को देखता रहा। फिर क्या था, बांके बिहारी जी भक्त से रिझ गए और उसके साथ चल दिए। इसके बाद तब बड़ी मुश्किल से भगवान श्री कृष्ण को मंदिर में वापस लाया गया। यही कारण है कि बांके बिहारी जी की मूर्ति पर पर्दा लगाया जाता है।
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