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    सावन में महाकाल के दर्शन: भारत के एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा और अनुष्ठान

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 08:26 AM (IST)

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो उज्जैन में स्थित है। श्रावण मास में इसके दर्शन और प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती ...और पढ़ें

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन मध्य प्रदेश

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन मध्य प्रदेश

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शिव महापुराण के अनुसार, श्रावण मास के महीने में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भारत में सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा अर्चना करने का खास महत्व है।

    आज के इस लेख में हम बात करेंगे बात के तीसरे ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर की, जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित सदियों से लोग भगवान महाकाल को अपना राजा और रक्षक मानकर उनकी पूजा करते आ रहे हैं।

    महाकालेश्वर मंदिर की उत्पत्ति

    महाकालेश्वर मंदिर की उत्पत्ति प्रागैतिहासिक काल बताई जाती है, हालांकि इसके निर्माण के सटीक जानकारी बता पाना मुश्किल है। पवित्र महाकाल ज्योतिर्लिंग मंदिर के सबसे निचले तल पर स्थापित है। इसके ऊपर ओंकारेश्वर शिवलिंग है और सबसे ऊपरी तल पर नागचंद्रेश्वर शिवलिंग है, जो नाग पंचमी के मौके पर साल में सिर्फ एक बार ही खुलता है।

    मंदिर की वास्तुकला भूमिज, चालुक्य और मराठा स्थापत्य शैलियों पर आधारित हैं। महाकालेश्वर मंदिर का कई बार निर्माण और पुनर्निर्माण कराया गया है। वर्तमान संरचना का निर्माण करीब 150 साल पहले सिंधिया प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी रामचंद्र बाबा शेनवी ने पूर्व के मंदिरों के बचे अवशेषों का इस्तेमाल करके करवाया था।

    महाकालेश्वर मंदिर

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी पौराणिक कथा

    शिव पुराण के मुताबिक, जब उज्जैन के लोग दूषण नाम के राक्षस से पीड़ित थे, तब उन्होंने भगवान शिव से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उनकी प्रार्थन को सुनने के बाद शिव एक तेजस्वी ज्योति के रूप में प्रकट हुए और राक्षस दूषण का वध किया था और उज्जैन में ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हुए।

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    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जहां रोजाना पवित्र भस्म आरती की जाती है। खासकर शिवरात्रि और श्रावण मास के दौरान यहां का भक्तिमय नजारा देखने लायक होता है।

    महाकालेश्वर मंदिर से जुड़े समारोह

    यह मंदिर अपनी खास भस्म आरती के लिए जाना जाता है, जहां रोजाना सूर्योदय से 90 मिनट पहले पवित्र राख से इस अनुष्ठान को किया जाता है। यह अनुष्ठान जीवन-मृत्यु चक्र का प्रतीक है।

    मंदिर के अनुष्ठान में साल भर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है। श्रावण माह से जुड़े त्योहारों जिन्में प्रत्येक सोमवार को निकलने वाली शोभा यात्रा, नाग पंचमी, शिवरात्रि और महाशिवरात्रि शामिल है। उज्जैन भारत के उन 4 पवित्र शहरों में शामिल है, जहां सिंहस्थ कुंभ मेला भी आयोजित किया जाता है, जो हर 12 साल में एक बार लगता है।

    Source- shrimahakaleshwar

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।