राजस्थान के इस मंदिर में छिपा है कलियुग के अंत का रहस्य, घोड़े का घाव भरते ही होगा कल्कि अवतार!
जयपुर में 300 साल पुराना कल्कि मंदिर भगवान विष्णु के अंतिम अवतार को समर्पित है। इस मंदिर में कल्कि भगवान के घोड़े देवदत्त की मूर्ति के पैर में एक दरार है, जिसके भरने पर कल्कि अवतार के धरती पर आने की मान्यता है।
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भगवान कल्कि का घोड़ा देवदत्त

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि जिनके जन्म को लेकर अक्सर कई तरह के अनसुलझे रहस्य देखने को मिलते हैं। हिंदू शास्त्रों के मुताबिक, जब धरती पर पाप और अधर्म का वर्चस्व होगा, तब इसे खत्म करने के लिए भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेकर कलियुग में जन्म लेंगे।
उनका जन्म आम मनुष्य के तौर पर होगा। भले ही अबतक कलियुग भगवान धरती पर अवतरित न हुए हो, लेकिन उनके आगमन के लिए पहले ही एक मंदिर का निर्माण हो चुका है।
जयपुर में भगवान कल्कि का दिव्य मंदिर
राजस्थान के जयपुर में करीब 300 साल पुराना एक मंदिर जो भगवान कल्कि को समर्पित है। आपको जानकार हैरानी होगी कि, यह मंदिर अपनी आध्यात्मिकता के लिए नहीं, बल्कि गहरे रहस्यों के लिए जाना जाता है।
यह भारत के उन मंदिरों में शामिल है, जिसका संबंध भगवान कल्कि और कलियुग के अंत से है। शास्त्रों और प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक, कलियुग में भगवान कल्कि अवतार लेंगे। इस मंदिर का निर्माण करीब 18वीं शताब्दी में कराया गया था।

कल्कि मंदिर किसने बनवाया?
बताया जाता है कि, जयपुर शहर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। इस मंदिर भगवान कल्कि के साथ उनके घोड़े को भी पूजा जाता है।
कई धार्मिक ग्रंथों में इस बात का जिक्र देखने को मिलता है कि, भगवान कल्कि अपने श्वेत और दिव्य घोड़े पर सवार होकर कलियुग का अंत करेंगे। उनके घोड़े का नाम देवदत्त होगा।
राजस्थान के इस मंदिर में रहस्यों का केंद्र सिर्फ भगवान कल्कि ही नहीं, बल्कि उनका घोड़ा भी है। मंदिर के गर्भगृह में मुख्य मूर्ति के साथ घोड़े की मूर्ति स्थापित है।
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घोड़े से जुड़ी चमत्कारी मान्यताएं
हैरान करने वाली बात यह है कि, मंदिर के प्रवेश द्वार पर घोड़े की एक अलग सफेद संगमरमर की मूर्ति है। इस मूर्ति के पिछले बाएं पैर में एक दरार है, जिसे स्थानीय लोग घाव मानते हैं।
कहा जाता है कि, जब यह घाव पूरी तरह भर जाएगा, तब कल्कि भगवान धरती पर अवतरित होंगे। स्थानीय पुजारी और लोगों का मानना है कि यह घाव सालों से भर रहा है।
सबसे आश्चर्यजनक बात यह भी है कि, अभी तक कल्कि अवतार पृथ्वी पर नहीं आए हैं लेकिन भारत वर्ष में कई अन्य कल्कि मंदिर है। इन मंदिरों में विधिपूर्वक उनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
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