ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जहां तीनों लोकों के भ्रमण के बाद विश्राम करते हैं भगवान शिव, क्या है इसका इतिहास?
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथा है, जो मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर स्थित है। यहां दर्शन के बिना सभी ...और पढ़ें

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (Picture Credits- AI Image)
HighLights
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथा ओंकारेश्वर।
नर्मदा नदी के तट पर स्थित, तीर्थ यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव।
मंदिर में प्रतिदिन तीन विशेष पूजाएं और सोमवार को जुलूस।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से चौथा ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का वर्णन स्कंद पुराण, शिव पुराण और वायु पुराण जैसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर स्थित है, जो इंदौर से करीब 77 किलोमीटर की दूरी पर बसा है। ऐसा माना रोजाना तीनों लोकों की यात्रा के बाद भगवान शिव यहां विश्राम करने के लिए आते हैं। इसलिए इस मंदिर में भगवान शिव के विश्राम व्यवस्था, अनुष्ठान और शयन दर्शन का भी ध्यान रखा जाता है।
यहां दर्शन नहीं किए तो तीर्थ यात्रा अधूरी मानी जाती है
हिंदू धर्म में सभी तीर्थ यात्रा के दर्शन के बाद ओंकारेश्वर के दर्शन व पूजन का खास महत्व है। तीर्थ यात्री सभी तीर्थों का जल लाकर ओंकारेश्वर धाम में शिवलिंग पर जला अर्पित करते हैं, तभी सभी तीर्थ पूर्ण माने जाते हैं अन्यथा वे यात्रा अधूरी रहती है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर एक 5 मंजिला इमारत है, जिसकी प्रथम मंजिल पर भगवान महाकालेश्वर का मंदिर है और तीसरी मंजिल पर सिद्धनाथ महादेव चौथी मंजिल पर गुप्तेश्वर महादेव और पांचवी मंजिल पर राजेश्वर महादेव का मंदिर है।

मंदिर प्रतिदिन तीन समय होती है पूजा
ओंकारेश्वर में कई मंदिर हैं। नर्मदा के दोनों दक्षिणी व उत्तरी तटों पर मंदिर बसे हैं। ओंकारेश्वर में ओमकार पर्वत का परिक्रमा पथ करीब 7 किलोमीटर लंबा मार्ग जो पक्के सीमेंट से बना है। रास्ते भर मन मोह लेने वाले नजारे देखने को मिलते हैं। परिक्रमा पथ पर सुंदर संगम स्थल भी हैं।
ओंकारेश्वर मंदिर में रोजाना तीन पूजा होती है। इन तीनों पूजा को कराने के लिए तीन अलग-अलग पुजारी हैं। सुबह के समय ट्रस्ट के पुजारी, दोपहर के समय सिंधिया घराने के पुजारी और शाम की पूजा में होलकर स्टेट के पुजारी पूजा करते हैं।
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इसके साथ ही प्रत्येक सोमवार को एक पालकी पर भगवान ओंकारेश्वर की तीन मुखों वाली सोने की मूर्ति को रखकर जुलूस निकाला जाता है। इस नगर भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों को भगवान के दर्शन प्राप्त होते हैं।
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