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जहां एक ही पिंड में विराजते हैं त्रिदेव: त्र्यंबकेश्वर में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अनोखे संगम की कहानी

Updated: Sun, 16 Aug 2026 07:00 AM (IST)

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, नासिक में गोदावरी के उद्गम स्थल पर स्थित, आठवां ज्योतिर्लिंग है जिसकी असाधारण विशेषता तीन मुखों वाला लिंग है जो त्रिदेवों का प्रतीक है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग देश का आठवां ज्योतिर्लिंग है, जो गोदावरी नदी के उद्गम स्थल पर बसा एक प्राचीन शिव मंदिर है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में स्थित ज्योतिर्लिंग की असाधारण खासियत है कि, यह तीन मुखों वाला लिंग है, जो त्रिदेव भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव का प्रतीक है।

वर्तमान समय में इस मंदिर का निर्माण तीसरे पेशवा बालाजी बाजीराव ने 1740 से 1760 के बीच एक पुराने मंदिर के स्थान पर कराया था। इस मंदिरों के चारों तरफ प्रवेश द्वार हैं अर्थात् पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशा में।

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मंदिर परिसर में पर्वत और तालाब

महाराष्ट्र के नासिक शहर से करीब 28 किलोमीटर दूरी पर स्थित है त्र्यंबकेश्वर महादेव हिंदू मंदिर जो 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। इस मंदिर के परिसर में ब्रह्मगिरी पर्वत और कुशावर्त कुंड (पवित्र तालाब) है। इस पवित्र तालाब को श्रीमंत सरदार राव साहेब पार्नेकर ने बनवाया था।

त्र्यंबक शब्द का मतलब है, त्रिदेवता जो भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक है। मंदिर एक 20 से 25 फुट की पत्थर की दीवार से बना है, जो इस मंदिर को एक समृद्ध रूप देता है। इसके अलावा यह पवित्र स्थान 4 कुंभ मेले की जगहों में शामिल है।

trimbakeshwar jyotirlinga

लिंग पुराण में त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का वर्णन

हिंदू धर्म के सबसे पवित्र पुराणों में शामिल लिंग पुराण के अनुसार,

तथा सूर्यस्य सोमस्य, तथा सोमस्य सूर्यस्य वन्ध्या अग्नि त्रयस्याच अम्बा उमा महादेव यंबोकास्तु त्रिंबक

अर्थात्- सोम, सूर्य, अग्नि ये तीनों अग्नि है जिसे प्रकाश आता है, ये तीनों अग्नि की माता अंबा है और इन तीन अग्नियों के पिता यही त्र्यंबक है। त्र्यंबकेश्वर भगवान को आद्य ज्योतिर्लिंग कहा जाता है, जो शिव तत्व से जुड़ा है।

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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी

एक बार सृष्टि के नियमन करने वाले दो तत्व शिव और शक्ति तत्व में 'मैं बड़ा हूं' की स्पर्धा शुरू हुई। शिव तत्व ने अपना आकार बढ़ाना शुरू किया तो शक्ति तत्व ने भी अपना आकार बड़ा किया। शिव तत्व के आकार में बढ़ने से ब्रह्मा जी की बनाई सृष्टि समाने लगी तो, उनके मन में भय आने लगा।

शक्ति तत्व का सामर्थ्य कम लगने लगा तब उन्होंने भगवान विष्णु को याद किया। भगवान विष्णु भी शक्ति तत्व से मिल गए और उन्होंने अपना विस्तार जारी रखा। यह देख भगवान विष्णु ने अंतर्मन से भगवान शिव से बातचीत किया। तब विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से शिव शक्ति का 12 टुकड़ों में विभाजन किया और पृथ्वी के ऊपर स्थापित किया जिसे बाद में 12 ज्योतिर्लिंग के रूप में पहचान मिली।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्वरूप

असल में इस ज्योतिर्लिंग का स्वरूप अन्य ज्योतिर्लिंग से काफी अलग है। त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग एक गड्ढा है, जिसमें अंगूठे के आकार की तीन लिंग है। उन लिंगों पर गोदावरी नदी का पानी धीरे-धीरे तीनों लिंगों का अभिषेक करता है। जो त्रिगुणात्मक है जो शिव के भाव से जुड़ा है।

Soure- Trimbakeshwar Jyotirlinga

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।