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    कौन हैं मां वाग्देवी जिनकी 11वीं सदी की मूर्ति ब्रिटेन से वापस लाने की हो रही है कोशिश?

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 01:30 PM (IST)

    भारत सरकार धार की भोजशाला से 11वीं सदी की वाग्देवी प्रतिमा को ब्रिटेन से वापस लाने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रही है। यह मुद्दा हाल ही में भोपाल में ...और पढ़ें

    हिंदू मां वाग्देवी (धार जिले के भोजशाला)

    हिंदू मां वाग्देवी (धार जिले के भोजशाला)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार ने मध्य प्रदेश के धार जिले के भोजशाला से जुड़ी 11वीं शताब्दी की वाग्देवी की मूर्ति वापस लाने के लिए एक बार फिर से नए सिरे से कोशिश कर रही है। यह मुद्दा हाल ही में भोपाल में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक के दौरान प्रमुखता से उठाया गया, जो 5 अगस्त को शुरू हुई थी।

    धार की ऐतिहासिक भोजशाला से करीब एक सदी पहले वाग्देवी की सफेद संगमरमर की प्रतिमा को ब्रिटेन ले जाया गया था, जिसे अब वापस लाने के लिए भारतीय राजनयिक ने प्रयास तेज कर दिए हैं। आखिर कौन हैं वाग्देवी जिनकी मूर्ति आज ब्रिटेन में है?

    धार भोजशाला मंदिर क्यों हैं खास? 

    मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मंदिर भारतीय इतिहास और धार्मिक दोनों ही नजरिए से बेहद खास है। इस मंदिर में ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां वाग्देवी (जिन्हें सरस्वती देवी भी कहा जाता है) की पूजा की जाती है।

    हिंदू समुदाय से जुड़े लोग इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानते हैं। राजा भोज वने (1000-1055 ई.) परमार राजवंश से जुड़े सबसे बड़े शासक होने के साथ शिक्षा और साहित्य के अनन्य उपासक थे। उन्होंने धार में एक महाविद्यालय की स्थापना की जिसे बाद में भोजशाला के रूप में पहचान मिली।

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    मां वाग्देवी कौन हैं?

    वाग्देवी को मां सरस्वी का ही एक स्वरूप बताया जाता है, जिन्हें ज्ञान, संगीत, कला और वाणी की अधिष्ठात्री देवी के रूप में भी पूजा जाता है। मां वाग्देवी मनुष्य को ज्ञान औ बुद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है।

    शास्त्रों में उनके स्वरूप को शांत और काफी दिव्य बताया गया है। वे सफेद रंग के वस्त्र धारण करती हैं और कमल पर विराजमान रहती हैं। उनका यह रूप पवित्र, ज्ञान और सृजन का प्रतीक माना जाता है।

    वाग्देवी के नाम का मतलब?

    'वाग्देवी' 2 शब्दों से मिलकर बना है, 'वाक्' और 'देवी' जिसमें वाक का मतलब है वाणी या शब्द और देवी का अर्थ है दिव्य शक्ति। इस तरह वाग्देवी का मतलब है वाणी की देवी या शब्दों की देवी।

    धार्मिक ग्रंथों में मां सरस्वती को ज्ञान और बुद्धि के साथ-साथ वाणी एवं अभिव्यक्ति की सबसे बड़ी देवी के रूप में पूजा जाता है।

    मां वाग्देवी किन नामों से जानी जाती हैं?

    मां वाग्देवी को अलग-अलग हिस्सों में कई नामों से जाना जाता है। इनमें मां सरस्वती, मां शारदा, भारती, सुभद्रा, सुवासिनी, वसुधा और वीणा वादिनी देवी के नामों से जाना जाता है। कला जगत से जुड़े लोग और विद्यार्थियों के लिए मां सरस्वती की काफी महिमा है।

    भारत में मुख्य रूप से सरस्वती पूजा जिसे वसंत पंचमी के नाम से भी जाना जाता है, मां सरस्वती की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन भोजशाला में मां वाग्देवी की खास-पूजा अर्चना की जाती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।