सबरीमाला ही नहीं, बल्कि इन 4 मंदिरों में भी महिलाओं के प्रवेश पर रोक! जानिए इसके पीछे का असल कारण
भारत के 5 ऐसे मंदिरों के बारे में बताता है जहाँ प्राचीन मान्यताओं और परंपराओं के कारण महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। ...और पढ़ें

इन 5 मंदिरों में महिलाओं की एंट्री पर रोक! (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपको जानकर हैरानी होगी कि, आज भी प्राचीन मान्यताओं, लोक परंपराओं और सदियों पुरानी रीति-रिवाजों के कारण कुछ खास मंदिरों में महिलाओं का प्रवेश करना वर्जित माना जाता है।
ये मंदिर केवल पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि अपने आप में सदियों पुरानी भक्ति, शक्ति और रहस्यों से भरी कहानियों को समाहित किए हुए हैं। आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे देशभर के 5 ऐसे मंदिर जहां आज भी महिलाओं के प्रवेश पर है नो एंट्री।
-1779432538511.jpg)
सबरीमाला मंदिर
केरल का सबरीमाला मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। जहां भगवान अय्पपा के ब्रह्मचर्य से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताओं की वजह से महिलाओं के प्रवेश की मनाही है।
केरल का यह मंदिर दुनियाभर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। 41 दिनों का उपवास के दौरान जो उनकी गहन भक्ति और अनुशासन को दर्शाता है। हालांकि इस मामलों को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है, लेकिन फिर भी आध्यात्मिक परंपरा मजबूत बनी हुई है।

शनि शिंगणापुर मंदिर
महाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर मंदिर, जो भगवान शनि देव को समर्पित है। यहां महिलाओं को गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है, क्योंकि मान्यताओं के मुताबिक शनि की शक्तिशाली ऊर्जा उन पर अलग तरह से असर दिखा सकती है।
यह मंदिर अपनी चमत्कारी कहानियों को लेकर भी काफी विख्यात है, जिसमें चोरी की गई चीजों को लौटाने वाले चोरों की कहानियां भी शामिल हैं।

गुरुवायूर मंदिर
केरल का एक और गुरुवायूर मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है, जहां मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के लिए कड़े नियम हैं।
परंपराओं के मुताबिक, महिलाओं को कुछ गर्भगृहों में प्रवेश करने नहीं दिया जाता है, जो अनुष्ठानिक पवित्रता में सदियों पुरानी मान्यताओं को दर्शाता है। भक्त इसे दैवीय निर्देश मानते हैं, जो भेदभाव के बजाय आध्यात्मिकता पर आधारित है।
कोटिलिंगेश्वर मंदिर
कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर जो अपने लाखों शिवलिंगों के लिए काफी प्रसिद्ध है। सदियों पुरानी परंपराओं के मुताबिक, आध्यात्मिक एनर्जी को सुरक्षित करने की परंपरा के तहत खास त्योहारों के दौरान महिलाओं को मंदिर के कुछ आंतरिक क्षेत्रों में जाने की मनाही होती है। यह मंदिर गहरी भक्ति, ध्यान और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।
खबरें और भी

मूकाम्बिका मंदिर
कर्नाटक का ही मूकाम्बिका मंदिर जो कोडाचाद्री पहाड़ियों पर बसा है, मां मूकाम्बिका देवी को समर्पित है। पवित्रता और धार्मिक ऊर्जा से जुड़ी ऐतिहासिक परंपराओं के मुताबिक, कुछ आयु वर्ग की महिलाओं को पारंपरिक रूप से मंदिर के कुछ हिस्सों में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
नवरात्रि और अन्य त्योहारों के दौरान हजारों तीर्थयात्री इस मंदिर में आते हैं, जो आस्था, अनुशासन और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है।
यह भी पढ़ें- राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से मुक्ति दिलाते हैं भारत के ये 6 प्रसिद्ध मंदिर!
यह भी पढ़ें- घर के मंदिर में सूखे फूल रखना शुभ या अशुभ, तुरंत जान लें क्या कहता है वास्तु शास्त्र?
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
