सावन के महीने में 'ऊं नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र', किसका जाप देगा सबसे अधिक फल?
सावन में भगवान शिव के प्रिय मंत्रों 'ऊं नमः शिवाय' और 'महामृत्युंजय मंत्र' के महत्व की तुलना की गई है। ज्योतिषियों के अनुसार, दोनों मंत्र शक्तिशाली है ...और पढ़ें

श्रावण मास में शिव से जुड़े शिव मंत्रों का महत्व (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव को श्रावण मास का महीना अत्यंत प्रिय है। सावन के महीने में महादेव की पूजा करने से कई गुना फल की प्राप्ति होने के साथ सदैव उनका आशीर्वाद मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक श्रावण मास में पूजा-पाठ कभी भी खाली नहीं जाती है। विशेषकर श्रावण के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सावन के महीने में पूजा-पाठ के अलावा भगवान शिव से जुड़े मंत्रों का भी विशेष महत्व है। प्रत्येक भक्त अपनी समझ के हिसाब से जो मंत्र उसे याद हो वह उसका उच्चारण शिव पूजा के दौरान करता है।
भगवान शिव से जुड़े मंत्रों का महत्व
भगवान शिव से जुड़ा 'ऊं नमः शिवाय' और 'महामृत्युंजय मंत्र' दोनों ही बड़े खास है लेकिन सावन के महीने में इन दोनों मंत्र में से किसका जाप करना अधिक लाभ प्रदान करेगा आइए जानते हैं एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषीय से।
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, ऊं नमः शिवाय और महामृत्युंजय दोनों ही मंत्र अत्यंत शक्तिशाली हैं, लेकिन इनका उपयोग और समय अलग-अलग मनोकामनाओं के अनुसार निर्धारित है। ऊं नमः शिवाय भगवान शिव का पंचाक्षर मंत्र है।
महामृत्युंजय मंत्र
ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||
ऊं नमः शिवाय मंत्र जाप करने का उद्देश्य
ऊं नमः शिवाय मंत्र सामान्य एवं दैनिक साधना, मन की शांति, आत्मिक शुद्धि, भक्ति और दैनिक शिव पूजन के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
समय और नियम
इस मंत्र को कोई भी, कभी भी और कहीं भी सवेरे या संध्या समय जप सकता है।
महामृत्युंजय मंत्र जाप करने का उद्देश्य
किसी विशेष संकट व स्वास्थ्य लाभ के लिए इसका जप किया जाता है। जब जीवन में अकाल मृत्यु का भय हो, गंभीर बीमारी हो, मानसिक तनाव या कोई बड़ा संकट हो, तब इस मंत्र का अनुष्ठान किया जाता है।
समय और नियम
इसका जप विशेषकर सुबह के समय, दीपक जलाकर और संकल्प लेकर करना चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र जीवन के हर भय, रोग और संकट से उबारने वाली अभेद्य ढाल है।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप क्यों जरूरी?
जिन भी लोगों की कुंडली में राहु और केतु की महादशा चल रही है या अचानक दुर्घटनाएं और बीमारियां बढ़ने लगती हैं। उन्हें इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। इसके अलावा शनि की साढ़ेसाती, मानसिक तनाव, बिजनेस में नुकसान, कुंडली में मारकेश ग्रह की दशा या फिर काल सर्पदोष इन सभी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।