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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 23, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Sawan Somwar 2024: कब है सावन का दूसरा सोमवार व्रत, जानें कैसे करें महादेव की पूजा?

    Updated: Tue, 23 Jul 2024 05:13 PM (GMT+05:30)

    सनातन धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार सावन महीने की शुरुआत 22 जुलाई (Sawan Somwar 2024) से हो गई है। इस माह में पड़ने वाले स ...और पढ़ें

    Sawan 2024: सावन में ऐसे करें महादेव की पूजा
    Sawan 2024: सावन में ऐसे करें महादेव की पूजा

    HighLights

    1. सावन का महीना शिव जी समर्पित है।
    2. सावन सोमवार का व्रत किया जाता है।
    3. इस दिन महादेव का अभिषेक किया जाता है।

    धर्म डेस्क,, नई दिल्ली। Sawan ka dusra somwar vrat kab hai 2024: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना देवों के देव महादेव को बेहद प्रिय है। इस माह में जो भक्त सच्चे मन से शिव जी और माता पार्वती की पूजा-अर्चना और व्रत करता है, उसे सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद का प्राप्त होती है और महादेव प्रसन्न होते हैं। सावन का दूसरा सोमवार व्रत 29 जुलाई (Sawan Somwar Vrat 2O24 Date) को पड़ रहा है।

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    सावन सोमवार पूजा विधि (Sawan Somwar Vrat Puja Vidhi)

    • सावन सोमवार व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मंदिर की सफाई कर गंगाजल के छिड़काव से शुद्ध करें।
    • इसके पश्चात भगवान शिव का गुड़, दही, गंगाजल, दूध, घी और शक्कर समेत आदि चीजों से रुद्राभिषेक करें। अब उन्हें बेलपत्र, चंदन, अक्षत, फल इत्यादि अर्पित करें।
    • दीपक जलाकर आरती करें और मंत्रों का जप करें। साथ ही शिव चालीसा का पाठ करें
    • इसके बाद महादेव को सफेद मिठाई, हलवा, दही, पंचामृत, भांग का भोग लगाएं और लोगों में प्रसाद का वितरण करें।

    सावन सोमवार व्रत भगवान शिव मंत्र (Lord Shiv Mantra)

    1. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।

    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।

    2. मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।

    मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नम: शिवाय ।।

    3. नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।

    नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ।।

    4. शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।

    श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम: शिवाय ।।

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