भगवान की पुरानी तस्वीरें और कैलेंडर खराब हो जाएं तो क्या करें? पढ़ें विसर्जन का सही नियम
भारतीय घरों में पुरानी धार्मिक तस्वीरें और कैलेंडर को गलत तरीके से फेंकना वास्तु और धार्मिक दोनों ही तरीके से ...और पढ़ें
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पुरानी धार्मिक तस्वीरों के लिए वास्तु टिप्स (Picture Credits- AI Images)
HighLights
पुरानी धार्मिक तस्वीरें और कैलेंडर का सही निपटारा महत्वपूर्ण।
गलने वाली चीजें जल में प्रवाहित करें, फ्रेम हटाकर।
न गलने वाली चीजें अग्नि में जलाकर राख विसर्जित करें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अधिकतर भारतीय घरों में पूजा वाले कैलेंडर या देवी-देवताओं से से जुड़ी तस्वीर जरूर देखने को मिलती है। लेकिन जब ये तस्वीरें और धार्मिक कैलेंडर खराब होने लगते हैं तो उन्हें कई लोग जाने-अनजाने में कहीं भी फेंक देते हैं, जो कि वास्तु और धार्मिक दोनों ही नजरिए से गलत माना जाता है।
ऐसे में एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि, धार्मिक पुस्तकें, कैलेंडर या तस्वीरों का सही निपटारा कैसे किया जाए?
घर की दीवारों और पूजा स्थल में लगाई गई भगवान की तस्वीरें, धार्मिक कैलेंडर या किसी भी देवी-देवता की छवि समय के साथ खराब होने लगती है और लंबे समय तक रखने पर उनमें नमी या दीमक लगने की समस्या देखने को मिल सकती है।
ऐसे में लोग अक्सर पुरानी हो चुकी तस्वीरों या धार्मिक चीजों को मंदिरों, पीपल के पेड़ या किसी सरोवर के आसपास छोड़कर चले जाते हैं। कई लोगों को निस्तारण का यह तरीका अधिक व्यवहारिक लग सकता है लेकिन धार्मिक नजरिए से इसे गलत माना जाता है। पेड़ों के नीचे भगवान की तस्वीर या पूजा-पाठ से जुड़ी चीजों को छोड़ना न तो शास्त्र सम्मत है और न ही पर्यावरण के लिए अनुकूल है।

(AI Images)
निस्तारण का सही तरीका क्या है?
सनातन धर्म में पंच तत्वों का अधिक महत्व है और खासतौर पर अग्नि और जल को शुद्ध माना गया है। ऐसे में पुरानी हो चुकी तस्वीरों को दो तरह से निपटारा करना चाहिए। सबसे पहले तो गलने वाली चीजें जैसे कागज की तस्वीरें जल में प्रवाहित कर दें। अगर उनपर पहले से कोई फ्रेम लगा है, तो उसे फ्रेम से हटाकर बहते जल में प्रवाहित करें।
जबकि जो चीजें न गलने वाली, जैसे- लकड़ी या कपड़े से बनी तस्वीर को अग्नि में जला दें। अग्नि में विसर्जन कर राख को जल में प्रवाहित भी कर सकते हैं और किसी पेड़ के नीचे भी दफन कर सकते हैं। हिंदू शास्त्रों में धार्मिक वस्तुओं का अग्नि विसर्जन करना सही माना जाता है। यही तरीका आपको तभी करना है जब पूर्वजों की तस्वीर किसी कारण से खराब हो जाए।
हमें भगवान, पूर्वज और धर्म से संबंधित हर चित्र या सामग्री का निस्तारण पूरी श्रद्धा, शास्त्र और पर्यावरण के अनुरूप ही करना चाहिए।
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