Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर गंगा स्तोत्र का पाठ, दूर करेगा जीवन के सारे कष्ट
माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है, जो इस बार 18 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। मौनी अमावस्या के ...और पढ़ें
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Mauni Amavasya 2026 (Picture Credit: Freepik) (AI Image)
HighLights
18 जनवरी को मनाई जाएगी मौनी अमावस्या
गंगा स्नान से मिलती है देवी-देवताओं की कृपा
पूरे माघ माह में किया जाता है गंगा स्नान अनुष्ठान
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माघ माह की मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) को मौनी अमावस भी कहा जाता है, जिसे हिंदू धर्म की प्रमुख तिथियों में से एक माना जाता है। यह कोई आम तिथि नहीं है, बल्कि हिंदू धर्म में इसे एक पर्व की तरह मनाया जाता है। इस दिन पर स्नान दान करने से साधक को देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन पर गंगा स्तोत्र का पाठ कर आप और भी अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
गंगा स्तोत्र (Ganga Stotra Lyrics)
ॐ नमः शिवायै गंगायै, शिवदायै नमो नमः।
नमस्ते विष्णु-रुपिण्यै, ब्रह्म-मूर्त्यै नमोऽस्तु ते।।
नमस्ते रुद्र-रुपिण्यै, शांकर्यै ते नमो नमः।
सर्व-देव-स्वरुपिण्यै, नमो भेषज-मूर्त्तये।।
सर्वस्य सर्व-व्याधीनां, भिषक्-श्रेष्ठ्यै नमोऽस्तु ते।
स्थास्नु-जंगम-सम्भूत-विष-हन्त्र्यै नमोऽस्तु ते।।
संसार-विष-नाशिन्यै, जीवानायै नमोऽस्तु ते।
ताप-त्रितय-संहन्त्र्यै, प्राणश्यै ते नमो नमः।।
शन्ति-सन्तान-कारिण्यै, नमस्ते शुद्ध-मूर्त्तये।
सर्व-संशुद्धि-कारिण्यै, नमः पापारि-मूर्त्तये।।
भुक्ति-मुक्ति-प्रदायिन्यै, भद्रदायै नमो नमः।
भोगोपभोग-दायिन्यै, भोग-वत्यै नमोऽस्तु ते।।
मन्दाकिन्यै नमस्तेऽस्तु, स्वर्गदायै नमो नमः।
नमस्त्रैलोक्य-भूषायै, त्रि-पथायै नमो नमः।।
नमस्त्रि-शुक्ल-संस्थायै, क्षमा-वत्यै नमो नमः।
त्रि-हुताशन-संस्थायै, तेजो-वत्यै नमो नमः।।
नन्दायै लिंग-धारिण्यै, सुधा-धारात्मने नमः।
नमस्ते विश्व-मुख्यायै, रेवत्यै ते नमो नमः।।
बृहत्यै ते नमस्तेऽस्तु, लोक-धात्र्यै नमोऽस्तु ते।
नमस्ते विश्व-मित्रायै, नन्दिन्यै ते नमो नमः।।
पृथ्व्यै शिवामृतायै च, सु-वृषायै नमो नमः।
परापर-शताढ्यै, तारायै ते नमो नमः।।
पाश-जाल-निकृन्तिन्यै, अभिन्नायै नमोऽस्तु ते।
शान्तायै च वरिष्ठायै, वरदायै नमो नमः।।
उग्रायै सुख-जग्ध्यै च, सञ्जीविन्यै नमोऽस्तु ते।
ब्रह्मिष्ठायै-ब्रह्मदायै, दुरितघ्न्यै नमो नमः।।
प्रणतार्ति-प्रभञजिन्यै, जग्मात्रे नमोऽस्तु ते।
सर्वापत्-प्रति-पक्षायै, मंगलायै नमो नमः।।
शरणागत-दीनार्त-परित्राण-परायणे।
सर्वस्यार्ति-हरे देवि! नारायणि ! नमोऽस्तु ते।।
निर्लेपायै दुर्ग-हन्त्र्यै, सक्षायै ते नमो नमः।
परापर-परायै च, गंगे निर्वाण-दायिनि।।
गंगे ममाऽग्रतो भूया, गंगे मे तिष्ठ पृष्ठतः।
गंगे मे पार्श्वयोरेधि, गंगे त्वय्यस्तु मे स्थितिः।।
आदौ त्वमन्ते मध्ये च, सर्व त्वं गांगते शिवे!
त्वमेव मूल-प्रकृतिस्त्वं पुमान् पर एव हि।।
गंगे त्वं परमात्मा च, शिवस्तुभ्यं नमः शिवे।।
फल-श्रुति
य इदं पठते स्तोत्रं, श्रृणुयाच्छ्रद्धयाऽपि यः।
दशधा मुच्यते पापैः, काय-वाक्-चित्त-सम्भवैः।।
रोगस्थो रोगतो मुच्येद्, विपद्भ्यश्च विपद्-युतः।
मुच्यते बन्धनाद् बद्धो, भीतो भीतेः प्रमुच्यते।।

(AI Generated Image)
मौनी अमावस पर गंगा स्नान का महत्व
ऐसा माना जाता है कि, मौनी अमावस्या के दिन गंगा का जल अमृतमय हो जाता है। यही कारण है कि मौनी अमावस्या को गंगा स्नान के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु दूर-दूर से गंगा स्नान के लिए जाते हैं। केवल मौनी अमावस्या के दिन ही नहीं, बल्कि पूरे माघ माह में गंगा स्नान का महत्व माना गया है। कई भक्त रोजाना गंगा में पवित्र डुबकी लगाने का संकल्प लेते हैं। प्रतिदिन गंगा स्नान का यह अनुष्ठान पौष पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलता है।
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