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    Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत पर करें हनुमान बीसा का चमत्कारिक पाठ, शनि देव खुद बदल देंगे आपका भाग्य

    Updated: Tue, 10 Feb 2026 07:00 PM (IST)

    शिव पुराण में निहित है कि प्रदोष व्रत (Shani Pradosh Vrat 2026) करने से साधक को जन्म-जन्मांतर में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही जीवन मे ...और पढ़ें

    Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

    Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व 

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, शनिवार 14 फरवरी को प्रदोष व्रत है। शनिवार के दिन पड़ने के चलते यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा। प्रदोष व्रत के दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही विशेष कामों में सफलता के लिए व्रत रखा जाता है।

    Bhagwan Shiv

    प्रदोष व्रत का फल दिन अनुसार मिलता है। शनि प्रदोष व्रत (Shani Pradosh Vrat remedies) करने से सुख, सौभाग्य और वंश में वृद्धि होती है। साथ ही शनि की बाधा दूर हो जाती है।

    ज्योतिष शनि बाधा (Overcoming Shani Dosha with Hanuman Puja) दूर करने के लिए हनुमान जी की पूजा करने की सलाह देते हैं। अगर आप भी शनि देव की कुदृष्टि से बचना चाहते हैं, तो शनि प्रदोष व्रत पर विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करें। वहीं, पूजा के समय हनुमान बीसा (Hanuman Bisa Path benefits) का पाठ करें।

    हनुमान बीसा

    दोहा

    राम भक्त विनती करूँ,सुन लो मेरी बात ।
    दया करो कुछ मेहर उपाओ, सिर पर रखो हाथ ।।

    ।। चौपाई ।।

    जय हनुमन्त, जय तेरा बीसा, कालनेमि को जैसे खींचा ।।
    करुणा पर दो कान हमारो, शत्रु हमारे तत्क्षण मारो ।।
    राम भक्त जय जय हनुमन्ता, लंका को थे किये विध्वंसा ।।
    सीता खोज खबर तुम लाए, अजर अमर के आशीष पाए ।।
    लक्ष्मण प्राण विधाता हो तुम, राम के अतिशय पासा हो तुम ।।
    जिस पर होते तुम अनुकूला, वह रहता पतझड़ में फूला ।।
    राम भक्त तुम मेरी आशा, तुम्हें ध्याऊँ मैं दिन राता ।।
    आकर मेरे काज संवारो, शत्रु हमारे तत्क्षण मारो ।।
    तुम्हरी दया से हम चलते हैं, लोग न जाने क्यों जलते हैं ।।
    भक्त जनों के संकट टारे, राम द्वार के हो रखवारे ।।
    मेरे संकट दूर हटा दो, द्विविधा मेरी तुरन्त मिटा दो ।।
    रुद्रावतार हो मेरे स्वामी, तुम्हरे जैसा कोई नाहीं ।।
    ॐ हनु हनु हनुमंत का बीसा, बैरिहु मारु जगत के ईशा ।।
    तुम्हरो नाम जहाँ पढ़ जावे, बैरि व्याधि न नेरे आवे ।।
    तुम्हरा नाम जगत सुखदाता, खुल जाता है राम दरवाजा ।।
    संकट मोचन प्रभु हमारो, भूत प्रेत पिशाच को मारो ।।
    अंजनी पुत्र नाम हनुमन्ता, सर्व जगत बजता है डंका ।।
    सर्व व्याधि नष्ट जो जावे, हनुमद् बीसा जो कह पावे ।।
    संकट एक न रहता उसको, हं हं हनुमंत कहता नर जो ।।
    ह्रीं हनुमंते नमः जो कहता, उससे तो दुख दूर ही रहता ।।

    ।। दोहा।।

    मेरे राम भक्त हनुमन्ता, कर दो बेड़ा पार ।
    हूँ दीन मलीन कुलीन बड़ा, कर लो मुझे स्वीकार ।।
    राम लषन सीता सहित, करो मेरा कल्याण ।
    ताप हरो तुम मेरे स्वामी, बना रहे सम्मान ।।
    प्रभु राम जी माता जानकी जी, सदा हों सहाई ।
    संकट पड़ा यशपाल पे, तभी आवाज लगाई ।।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।