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    कुंडली में राहु-केतु मचा रहा है कोहराम? तो इन मंत्रों के जप से पाएं राहत

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 07:03 PM (IST)

    अगर कुंडली में राहु-केतु की खराब स्थिति के चलिए आपके जीवन में समस्याएं आ रही है, तो आप इन तरीकों से इससे राहत पा सकते हैं। ...और पढ़ें

    राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से पाएं मुक्ति (Picture Credit- AI Generated)

    राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से पाएं मुक्ति (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. ज्योतिष मेें राहु-केतु को अशुभ छाया ग्रह माना जाता है

    2. राहु-केतु कवच पाठ से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं

    3. शनिवार को दान और कुत्ते को भोजन कराना है लाभकारी

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को अशुभ छाया ग्रह माना गया है, जिनकी खराब स्थिति जीवन में समस्याएं बढ़ा सकती है। इन ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए आप राहु ग्रह कवच और केतु ग्रह कवच का पाठ कर सकते हैं। इसके साथ ही कुछ उपाय करने से आपको नकारात्मक प्रभावों से राहत मिल सकती है।

    ॥राहु ग्रह कवच॥

    ''अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रमंत्रस्य चंद्रमा ऋषिः ।

    अनुष्टुप छन्दः । रां बीजं । नमः शक्तिः ।

    स्वाहा कीलकम् । राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥

    प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिन् ॥

    सैन्हिकेयं करालास्यं लोकानाम भयप्रदम् ॥

    निलांबरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः ।

    चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरीरवान् ॥

    नासिकां मे धूम्रवर्णः शूलपाणिर्मुखं मम ।

    जिव्हां मे सिंहिकासूनुः कंठं मे कठिनांघ्रीकः ॥

    भुजङ्गेशो भुजौ पातु निलमाल्याम्बरः करौ ।

    पातु वक्षःस्थलं मंत्री पातु कुक्षिं विधुंतुदः ॥

    कटिं मे विकटः पातु ऊरु मे सुरपूजितः ।

    स्वर्भानुर्जानुनी पातु जंघे मे पातु जाड्यहा ॥

    गुल्फ़ौ ग्रहपतिः पातु पादौ मे भीषणाकृतिः ।

    सर्वाणि अंगानि मे पातु निलश्चंदनभूषण: ॥

    राहोरिदं कवचमृद्धिदवस्तुदं यो ।

    भक्ता पठत्यनुदिनं नियतः शुचिः सन् ।

    प्राप्नोति कीर्तिमतुलां श्रियमृद्धिमायु

    रारोग्यमात्मविजयं च हि तत्प्रसादात्'' ॥

    Rahu-Ketu ai

    (Picture Credit- AI Generated)

    ॥ केतु ग्रह कवच ॥

    ''अस्य श्रीकेतुकवचस्तोत्रमंत्रस्य त्र्यंबक ऋषिः ।

    अनुष्टप् छन्दः । केतुर्देवता । कं बीजं । नमः शक्तिः ।

    केतुरिति कीलकम् I केतुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥

    केतु करालवदनं चित्रवर्णं किरीटिनम् ।

    प्रणमामि सदा केतुं ध्वजाकारं ग्रहेश्वरम् ॥

    चित्रवर्णः शिरः पातु भालं धूम्रसमद्युतिः ।

    पातु नेत्रे पिंगलाक्षः श्रुती मे रक्तलोचनः ॥

    घ्राणं पातु सुवर्णाभश्चिबुकं सिंहिकासुतः ।

    पातु कंठं च मे केतुः स्कंधौ पातु ग्रहाधिपः ॥

    हस्तौ पातु श्रेष्ठः कुक्षिं पातु महाग्रहः ।

    सिंहासनः कटिं पातु मध्यं पातु महासुरः ॥

    ऊरुं पातु महाशीर्षो जानुनी मेSतिकोपनः ।

    पातु पादौ च मे क्रूरः सर्वाङ्गं नरपिंगलः ॥

    य इदं कवचं दिव्यं सर्वरोगविनाशनम् ।

    सर्वशत्रुविनाशं च धारणाद्विजयि भवेत्'' ॥

    राहत के लिए करें ये उपाय

    • शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।
    • शनिवार व्रत रखकर भी राहु के नकारात्मक प्रभाव कम किए जा सकते हैं।
    • शनिवार को राहु के लिए काले तिल, कंबल, या उड़द की दाल का दान करें।
    • काले या भूरे कुत्ते को रोटी या बिस्किट खिलाने से केतु का दोष शांत होता है।
    • राहु-केतु की शांति के लिए रोजाना 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जप करना भी लाभकारी है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।