Shri Rukmini Ashtakam: घर में चाहिए मां लक्ष्मी का वास? तो जरूर करें इस दिव्य अष्टकम का पाठ
Shri Rukmini Ashtakam Benefits & Lyrics: देवी रुक्मिणी को समर्पित यह आठ छंदों का स्तोत्र न केवल मन को शांति देता है, बल्कि जीवन में सौभाग्य और प्रेम क ...और पढ़ें

श्री रुक्मिणी अष्टकम का पाठ (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेक्स, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में देवी रुक्मिणी (Devi Rukmini) को साक्षात लक्ष्मी का अवतार माना गया है। भगवान श्री कृष्ण (Lord krishna) की प्रधान रानी और द्वारका की महारानी रुक्मिणी देवी का व्यक्तित्व प्रेम, समर्पण और धैर्य की मिसाल है।
उनकी कृपा पाने और जीवन में वैवाहिक सुख प्राप्त करने के लिए 'श्री रुक्मिणी अष्टकम' का पाठ अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इस स्तोत्र का पाठ अगर शुक्रवार को करें तो ज्यादा फलदायी होता है।
पाठ करने की सरल विधि
- वैसे तो आप इसे कभी भी पढ़ सकते हैं, लेकिन शुक्रवार (जो लक्ष्मी जी का दिन है) या एकादशी के दिन इसका पाठ करना विशेष फलदायी होता है।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सफेद या पीले वस्त्र धारण करें।
- श्री कृष्ण और माता रुक्मिणी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और उन्हें सफेद फूल या खीर का भोग लगाएं।
- पाठ करते समय अपना पूरा ध्यान माता के चरणों में रखें और मन ही मन सुख-शांति की प्रार्थना करें।
श्री रुक्मिणी अष्टकम (shri rukmini ashtakam stotra)
नमस्ते भीष्मकसुते वासुदेवविलासिनि ,
प्रद्युम्नाम्ब नमस्तुभ्यं प्रसीद परमेश्वरि।
नमः कमलमालिन्यै कमले कमलालये,
जगन्मातर्नमस्तुभ्यं कृष्णप्राणाधिकप्रिये।
जानकी त्वं च लक्ष्मीस्त्वं विष्णुवक्षःस्थलस्थिता,
वैकुण्ठपुरसाम्राज्ञी त्वं भक्ताभीष्टदायिनी।

(Image Source: AI-Generated)
स्वर्णवर्णे रमे रम्ये सौन्दर्याकररूपिणि,
मारमातर्महालक्ष्मि कृष्णकन्दर्पवर्धिनि।
वर्धिनी सुभगानां च वर्षिणी सर्वसम्पदाम् ,
नारायणाङ्घ्रियुग्मे त्वं नित्यदास्यप्रदायिनी।
गोविन्दपट्टमहिषि द्वारकापुरनायिके,
शरण्ये वत्सले सौम्ये भीमातीरनिवासिनि।
त्वदन्या का गतिर्मातरगतीनां जगत्त्रये,
कृष्णकारुण्यरूपा त्वं तत्क्षान्तिपरिवर्धिनी।
कृष्णे त्वयि च हे मातर्दृढा भक्तिः सदाऽस्तु नः,
जयोऽस्तु जय वैदर्भि रुक्मिण्यम्ब जयोऽस्तु ते।
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