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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 01, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Surya Dev: रविवार को सूर्य देव की पूजा में करना न भूलें इस स्तुति का पाठ, मिलेगा मनचाहा करियर

    Updated: Sun, 01 Sep 2024 06:30 AM (GMT+05:30)

    सनातन धर्म में ज्योतिष शास्त्र का विशेष महत्व है। इसमें सभी तरह की समस्या से मुक्ति पाने के लिए उपाय बताए गए हैं। माना जाता है कि यदि सूर्य अशुभ स्थित ...और पढ़ें

    Surya Dev: रविवार को जरूर करें सूर्य स्तुति का पाठ
    Surya Dev: रविवार को जरूर करें सूर्य स्तुति का पाठ

    HighLights

    1. सूर्य देव को रविवार का दिन समर्पित है।
    2. इस दिन सूर्य देव की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
    3. पूजा के दौरान सूर्य स्तुति का पाठ करना कल्याणकारी माना जाता है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में सप्ताह के सभी दिन किसी न किसी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने का विधान है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। रोजाना सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव की पूजा और जल अर्पित करना चाहिए। साथ ही सूर्य स्तुति का पाठ करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना करने से साधक को मनचाहा करियर प्राप्त होता है सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। आइए पढ़ते हैं सूर्य स्तुति।

    ।। श्री सूर्य स्तुति ।।

    जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।

    त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥

    जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

    सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।

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    दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी

    जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

    सुर-मुनि-भूसुर-वन्दित, विमल विभवशाली।

    अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥

    जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

    सकल-सुकर्म-प्रसविता, सविता शुभकारी।

    विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥

    जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

    कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।

    सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा॥

    जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

    नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।

    वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥

    जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

    सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।

    हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥

    जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

    सूर्याष्टकम

    आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।

    दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते

    सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।

    श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

    लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।

    महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

    त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् ।

    महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

    बृंहितं तेजःपुञ्जं च वायुमाकाशमेव च ।

    प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

    बन्धुकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।

    एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

    तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजः प्रदीपनम् ।

    महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

    तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।

    महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम्

    भगवान सूर्य के मंत्र

    1. ॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:

    2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

    3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।

    4. ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।

    5. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।

    6. ॐ सूर्याय नम: ।

    7. ॐ घृणि सूर्याय नम: ।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।