अघोरियों वाली उग्र साधना से बचें गृहस्थ! बिना कड़े नियमों के सुख-समृद्धि पाने के लिए करें इन महाविद्याओं की उपासना
गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि और शांति के लिए तंत्र शास्त्र कुछ महाविद्याओं की पूजा की सलाह देता है। कौन-सी देवियां गृहस्थों के लिए सबसे उपयुक्त मानी जा ...और पढ़ें

गृहस्थ जीवन में कौन-सी देवी की पूजा करना शुभ? (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म के शाक्त संप्रदाय में 10 महाविद्याओं को सबसे शक्तिशाली माना जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथ तंत्र शास्त्र जैसे मुंडमाला तंत्र, तोडल तंत्र और रुद्रयामल तंत्र के मुताबिक, इन महाविद्याओं को उनके स्वभाव के आधार पर दो खास श्रेणियों में बांटा गया है। जिसमें एक श्रेणी उग्र औ दूसरी सौम्य (शांत) है।
हिंदू धर्म के अनुसार एक गृहस्थ के जीवन की खुशी भौतिक सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति पर निर्भर करती है। तंत्र शास्त्र में साफ-साफ उल्लेख किया गया है कि, कभी भी बिना योग्य गुरु के उग्र साधनाएं गृहस्थ जीवन पर नकारात्मक प्रभाव दिखा सकती है। इसलिए, शास्त्रों और प्रमाणों के आधार पर गृहस्थों के लिए कुछ ऐसी महाविद्याएं हैं, जिनकी पूजा करने से गृहस्थ जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है।

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मां कमला देवी (Maa Kamla Devi)
हिंदू धर्म में मां कमला देवी को धन, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की देवी कहा जाता है। तंत्र ग्रंथों के मुताबिक, मां कमला देवी 10 महाविद्याओं में सबसे खास और स्वभाव से बेहद सौम्य है। यह देवी मां लक्ष्मी का ही तांत्रिक और सर्वोच्च रूप माना जाता है।
मां कमला देवी की सच्चे मन से साधना करने पर गृहस्थ जीवन में धन-धान्य, ऐश्वर्य, कर्ज से मुक्ति के साथ अखंड की प्राप्ति होती है। भार्गव पुराण के तंत्रसार के मुताबिक, मां कमला की साधना में कठिन तांत्रिक नियमों की छूट होती है। सात्विक भाव, कमल के फूल और सामान्य दीप नैवेद्य से ही मां कमला देवी प्रसन्न हो जाती हैं। गृहस्थों को इनकी पूजा जरूर करनी चाहिए।
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मां त्रिपुरा सुंदरी (Maa Tripura Sundari)
हिंदू धर्म में मां त्रिपुरा सुंदरी को श्री विद्या साधना की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। ब्रह्मांड पुराण के मुताबिक, मां को ब्रह्मांड की सबसे सुंदर, दयालु और सर्वोच्च शक्ति माना जाता है। 10 महाविद्या में यह एक मात्र ऐसी विद्या हैं, जो भोग और मोक्ष दोनों का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। जिन भी लोगों के दांपत्य जीवन में प्यार की कमी, पारिवारिक क्लेश या मानसिक तनाव बना रहता है, उन्हें मां त्रिपुरा सुंदरी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
परशुराम कल्पसूत्र औ ललिता सहस्रनाम में बताया गया है कि, राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी की दक्षिण मार्गी पूजा से गृहस्थ साधक जीवन के सभी सुख भोगकर आखिर में मोक्ष प्राप्त करता है।

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मां तारा (Maa Tara)
हिंदू धर्म में मां तारा की पूजा प्रमुख तौर पर की जाती है। तंत्र शास्त्र के मुताबिक, मां तारा 10 महाविद्याओं में दूसरी और उग्र श्रेणी की देवी हैं। मूल रूप से मां तारा देवी को श्मशान की देवी भी कहा जाता है और इनकी उग्र तांत्रिक साधना बिना गुरु के करना वर्जित है।
हालांकि विद्या, कला और संवाद की प्राप्ति के लिए गृहस्थ मां तारा के नील सरस्वती स्वरूप की सात्विक रूप से पूजा कर सकते हैं। लेकिन बिना गुरु दीक्षा के उग्र तारा साधना करना वर्जित माना जाता है।
शारदा तिलक ग्रंथ के मुताबिक, उग्र देवियों (जिनमें मां काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी आदि शामिल है) की साधना संन्यासियों, अघोरियों या वीर स्वभाव वाले साधकों के लिए है। अगर आप गृहस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो मां त्रिपुरा सिंदुरी की उपासना सबसे सुरक्षित और सरल है। इनकी पूजा सात्विक रूप से ही करनी चाहिए।
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