सिर्फ सुदर्शन चक्र ही नहीं, श्रीकृष्ण के पास थे ये 10 अचूक अस्त्र-शस्त्र; जिनके आगे कोई नहीं टिकता
भगवान श्रीकृष्ण, जो 64 कलाओं में माहिर थे, कई शक्तिशाली अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित थे। इनमें सुदर्शन चक्र, पंचजन्य शंख, ब्रह्मास्त्र और उनकी बुद्धि ज ...और पढ़ें

भगवान श्रीकृष्ण के 10 खास हथियार कौन-से थे? (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान श्री हरि के आठवें अवतार के रूप में पृथ्वी लोक पर जन्म लेने वाले भगवान श्रीकृष्ण 64 कलाओं में माहिर थे। उनके पास कई ऐसे अस्त्र और शस्त्र थे, जिसके आगे कोई नहीं टिक पाता था। आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण के 10 प्रमुख अस्त्र-शस्त्र के बारे में।
बुद्धि
भगवान श्रीकृष्ण के पास सबसे बड़ा हथियार उनकी आध्यात्मिक शक्ति थी। भगवद गीता की शिक्षाओं में उन्हें अज्ञानता, डर और निराशा को पराजित कर इतिहास का रुख हमेशा के लिए बदल दिया था।
पंचजन्य शंख
भगवान श्रीकृष्ण के शंख का नाम पंचजन्म था, जो पंच तत्वों का प्रतीक माना जाता है। जब इसे बजाया जाता है, तो यह सृष्टि की सबसे प्राचीन ध्वनि पैदा करता है, जिसकी ध्वनि दुष्टों में डर की भावना को पैदा करती है और अच्छे लोगों को प्रेरित करती है। महाभारत काल में कुरुक्षेत्र युद्ध की शुरुआत पंचजन्य शंख से ही हुई थी।
दिव्य रथ
भगवान श्रीकृष्ण के पास खास रथ थे, जो शक्तिशाली होने के साथ दिव्य एनर्जी से भरे थे। उनके जैत्र और गरुड़ ध्वज नाम का रथ था। इस रथ को खींचने वाले घोड़ों में खास गुण थे। रथ के झंडे पर कपिध्वज था जो काफी शक्तिशाली होने के साथ आसमानी हथियारों का सामना कर सकता था।
नंगे हाथों
भगवान श्रीकृष्ण सिर्फ दिव्य हथियारों को चलाने में ही कुशल नहीं थे, बल्कि वे आमने-सामने की लड़ाई में भी उतने ही खतरनाक थे। बेहतरीन रफ्तार, जबरदस्त ताकत और सटीकता के साथ उन्होंने सिर्फ अपने नंगे हाथों से ही कितने ही राक्षसों और दुष्टों को मार गिराया था।
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ब्रह्मास्त्र
श्रीकृष्ण के पास सबसे दिव्य हथियारों में ब्रह्मास्त्र था, जिसे तबाही का सबसे बड़ा और प्रभावी हथियार माना जाता है। यह एकमात्र ऐसा हथियार था जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड की ताकत थी। ब्रह्मास्त्र सभी जीवों को हराने और दुनिया को खत्म करने की अकेले ताकत रखता था। इस वजह से ब्रह्मास्त्र को भगवान श्रीकृष्ण के सबसे ताकतवर हथियारों में गिना जाता है।
नारायणास्त्र
नारायणास्त्र एक आकाशीय मिसाइल थी, जो बेमिलास होने के साथ-साथ विनाशकारी ताकतों से परिपूर्ण थी। इसकी असल ताकत इसकी दिव्य बुद्धि में बताई जाती है, क्योंकि यह दुश्मनों पर अचूक निशाना साध सकती है। नारायणास्त्र चलाने वाले की इच्छा के अनुसार ढल जाता है।

नंदका
भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य तलवार का नाम नंदका है। भगवान विष्णु को यह तलवार ऋषि विश्वकर्मा ने भेंट की थी। नंदक तलवार को आमतौर पर खूबसूरती से बने हथियार के तौर पर दिखाया जाता है, जो भगवान की ताकत, ज्ञान और बुराई को काटने की ताकत का प्रतीक है।
सारंग धनुष
भगवान श्रीकृष्ण की धनुष का नाम सारंग था, जिसे भगवान विष्णु और उनके कई अवतार ने इस्तेमाल किया। इस धनुष को भगवान विश्वकर्मा ने बनाया था। यह नारायण की दिव्य शक्ति और अन्याय के खिलाफ ठोस कदम उठाने की उनकी अचूक क्षमता को दिखाता है।
कौमोदकी गदा
महाभारत काल में आकाश के देवता वरुण ने खांडव वन के जलने से पहले भगवान कृष्ण को यह गदा दी थी। कौमोदकी गदा में गरजने जैसी आवाज होती है और यह न सिर्फ शारीरिक बाधाओं को खत्म करती है, बल्कि आध्यात्मिक अंधकार और अज्ञानता मिटाने की भी क्षमता रखती है। भगवान श्रीकृष्ण की कौमोदकी गदा ज्ञान, समय और बुद्धि की शक्ति को दर्शाती है।
सुदर्शन चक्र
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का दिव्य और सबसे शक्तिशाली हथियार सुदर्शन चक्र था। यह कभी भी अपना निशाना नहीं चूकता था। बुराई को खत्म करने के बाद कृष्ण के पास लौट आता है। सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु को भगवान शिव ने भेंट किया था, जब विष्णु असुरों से युद्ध लड़ रहे थे। इसे दुनिया का सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है।
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