सिर्फ साधु-संत नहीं, कोई भी पहन सकता है रुद्राक्ष! पढ़ें इससे जुड़े 4 बड़े मिथक
हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माने जाने वाले रुद्राक्ष से जुड़े कई मिथक प्रचलित हैं। पीरियड्स में रुद्राक्ष उतारने, अलग मुखी रुद्राक्ष पहनने और इसे कौन ...और पढ़ें

रुद्राक्ष से जुड़े प्रचलित मिथक और उसके पीछे की सच्चाई (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म और वैदिक ग्रंथों में रुद्राक्ष को सबसे शक्तिशाली और अत्यंत पवित्र माना गया है। भारत और दुनिया भर में कई लोग इसे सदियों से धारण करते आ रहे हैं। हिंदू धर्म में इसकी मान्यता और भी खास इसलिए हो जाती है, क्योंकि इसे शिव से जुड़ा माना जाता है।
शिव महापुराण के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति महादेव के आंसुओं से हुई है और इसे धारण करने से मनुष्य के कर्म शुद्ध होने के साथ आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं रुद्राक्ष से जुड़े उन मिथकों के बारे में जिसे लेकर लोग अक्सर असमंजस की स्थिति में रहते हैं।
मिथक- पीरियड्स के दौरान आपको अपना रुद्राक्ष उतार देना चाहिए?
कई महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि, पीरियड्स के दौरान रुद्राक्ष धारण करना सही नहीं होता है, जबकि यह पूरी तरह से मिथक है। दरअसल रुद्राक्ष एक बीज है, जिसकी एनर्जी नाजुक नहीं है। किसी भी शास्त्र में पीरियड्स के दौरान इसे धारण न करने का कोई नियम नहीं है। यह फैसला पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है।
मिथक- अलग-अलग मुखी का रुद्राक्ष धारण करना अशुभ माना जाता है।
सबसे पहले तो यह समझने की जरूरत है कि, हिंदू धर्म में रुद्राक्ष का आध्यात्मिक महत्व काफी ज्यादा है, जिस वजह से इसे धारण करना अशुभ नहीं माना जाता है। 5 मुखी और 7 मुखी रुद्राक्ष को एक साथ पहनने से मनके की एनर्जी एक साथ काम करती है, न कि उनके खिलाफ। अलग-अलग मुखी के रुद्राक्ष आपकी एनर्जी को समर्थन करने के लिए है।
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मिथक- रुद्राक्ष सिर्फ साधु-संत और हिंदू ही धारण कर सकते हैं।
हिंदू धर्म के मुताबिक, रुद्राक्ष कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है, चाहे उसका धर्म, लिंग और जीवनशैली कुछ भी हो। कई लोग सोचते हैं कि, रुद्राक्ष की मालाएं सिर्फ साधु, संतों या कट्टर धार्मिक अनुयायियों से जुड़े लोग ही धारण करते हैं, जबकि रुद्राक्ष एक सार्वभौमिक आध्यात्मिक साधन है, जिसे हर कोई पहन सकता है।
मिथक- एक बार रुद्राक्ष धारण करने के बाद इसे कभी न उतारें
सच्चाई तो यह है कि, कई लोग इसे नहाते समय, शारीरिक संबंध स्थापित करते समय या श्मशान घाट जाते समय उतार देते हैं। ऐसा सम्मान के नजरिए से किया जाता है, न कि इससे रुद्राक्ष की एनर्जी कमजोर होती है। हिंदू धर्म में सम्मान का मतलब कोई रोक नहीं, बल्कि इसका असल अर्थ है कि, पवित्र वस्तुओं का सम्मान करना। ऐसे में इसे बार-बार उतारने से रुद्राक्ष की एनर्जी कम नहीं होती है।
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