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    Aaj ka Panchang 1 January 2026: नए साल और प्रदोष व्रत के दिन बन रहे ये शुभ योग, यहां पढ़ें पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 08:27 AM (IST)

    Aaj ka Panchang 1 जनवरी 2026 के अनुसार, आज से नए साल का आगाज हो गया है। नए साल के दिन गुरु प्रदोष व्रत पड़ रहा है। यह दिन महादेव और मां पार्वती की कृपा ...और पढ़ें

    Aaj ka Panchang 1 January 2026: गुरु प्रदोष व्रत का पंचांग (Image Source: AI generated)

    Aaj ka Panchang 1 January 2026: गुरु प्रदोष व्रत का पंचांग (Image Source: AI generated)

    आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। पंचांग के अनुसार, आज यानी 1 जनवरी को गुरु प्रदोष व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से साधक का जीवन सुख-शांति से भरा रहता है और महादेव की कृपा प्राप्त होती है। नए साल के दिन कई योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 1 January 2026) के बारे में।

    तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
    मास पूर्णिमांत: पौष
    दिन: गुरुवार
    संवत्: 2082

    तिथि: शुक्ल त्रयोदशी – रात्रि 10 बजकर 22 मिनट तक
    योग: शुभ – सायं 05 बजकर 12 मिनट तक
    करण: कौलव – दोपहर 12 बजकर 05 मिनट तक
    करण: तैतिल – रात्रि 10 बजकर 22 मिनट तक

    सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

    सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 14 मिनट पर
    सूर्यास्त का समय: सायं 05 बजकर 35 मिनट पर
    चंद्रोदय का समय: दोपहर 03 बजकर 14 मिनट पर
    चंद्रास्त का समय: 02 जनवरी को प्रातः 06 बजकर 07 मिनट पर

    आज के शुभ मुहूर्त

    अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक
    अमृत काल: सायं 07 बजकर 57 मिनट से रात्रि 09 बजकर 23 बजे तक

    आज के अशुभ समय

    राहुकाल: दोपहर 01 बजकर 42 बजे से दोपहर 03 बजे तक
    गुलिकाल: प्रातः 09 बजकर 49 मिनट से प्रातः 11 बजकर 07 मिनट तक
    यमगण्ड: प्रातः 07 बजकर 14 मिनट से प्रातः 08 बजकर 32 मिनट तक

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    (Image Source: AI generated)

    आज का नक्षत्र

    आज चंद्रदेव रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे।
    रोहिणी नक्षत्र: रात्रि 10 बजकर 48 मिनट तक
    सामान्य विशेषताएं: कला प्रिय, रचनात्मक, रोमांटिक, व्यावसायिक समझ, ऐश्वर्यप्रिय, जिद्दी, व्यवहारिक, भोग-विलासी, दिखावटी, बड़ी आंखें, ईमानदार, उदार, दानशील, संवाद-कुशल, एकाग्रचित्त, और शांत स्वभाव
    नक्षत्र स्वामी: चंद्र देव
    राशि स्वामी: शुक्र देव
    देवता: ब्रह्मा देव या प्रजापति
    प्रतीक: गाड़ी का पहिया

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    गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

    गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष आराधना का पावन अवसर माना जाता है। यह व्रत गुरुवारा के दिन त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पीले पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि गुरु प्रदोष व्रत करने से ज्ञान, भाग्य और आर्थिक स्थिरता में वृद्धि होती है।
    बृहस्पति ग्रह की कृपा से जीवन में सही दिशा और सद्बुद्धि प्राप्त होती है। संध्या के समय प्रदोष काल में शिव पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। यह व्रत मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।

    गुरु प्रदोष व्रत विधि

    • प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
    • व्रत का संकल्प लें और दिनभर उपवास या सात्विक आहार करें।
    • घर या मंदिर में शिवलिंग की स्थापना करें।
    • जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें।
    • बेलपत्र, पीले पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
    • संध्या समय प्रदोष काल में शिव जी की पूजा करें।
    • शिव मंत्र जाप और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
    • अंत में शिव आरती कर मनोकामना प्रार्थना करें।
    • अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें।

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    यह दैनिक पंचांग Astropatri.com के सौजन्य से प्रस्तुत है. सुझाव व प्रतिक्रियाओं के लिए hello@astropatri.com पर ईमेल करें।