आज का पंचांग 10 अगस्त: सावन के दूसरे सोमवार पर प्रदोष व्रत का महासंयोग, यहां देखें शिव पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त
10 अगस्त को सावन के दूसरे सोमवार पर प्रदोष व्रत का महासंयोग बन रहा है, जिसमें भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और पंचांग के अन्य महत्वपूर्ण विवरण ...और पढ़ें

सावन के दूसरे सोमवार पर प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग शिव पूजा के लिए जानें शुभ समय
आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। सावन महीने के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि के साथ आज सोमवार का दिन है जो प्रदोष व्रत के कारण और महत्वपूर्ण है।
आज प्रातः 8 बजे तक द्वादशी तिथि रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। चूंकि प्रदोष काल भी आज ही मिल रहा है, इसलिए आज यानी 10 अगस्त को ही प्रदोष का व्रत भी रखा जाएगा।
भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल को बेहद शुभ माना जाता है। आज आर्द्रा नक्षत्र दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा, इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा। दिन में अभिजीत मुहूर्त भी मौजूद होगा। जबकि राहुकाल सुबह 7:27 से 9:07 बजे तक है। आइए आपको बताते हैं किस मुहूर्त में आज शिव पूजन करना फलदायी होगा।
तिथि: कृष्ण पक्ष की द्वादशी – प्रातः 08:00 बजे तक, फिर त्रयोदशी तिथि (अगले दिन तड़के 04 बजकर 54 मिनट, 11 अगस्त तक),
योग: वज्र – रात्रि 10 बजकर 27 मिनट तक, फिर सिद्धि
करण: तैतिल – प्रातः 08:00 बजे तक
करण: गरज – सायं 06 बजकर 27 मिनट तक
करण: वणिज – अगले दिन तड़के 04 बजकर 54 मिनट (11 अगस्त) तक, फिर विष्टि (भद्रा)
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय: प्रातः 05 बजकर 47 मिनट तक
सूर्यास्त का समय: सायं 07 बजकर 05 मिनट तक
चंद्रोदय का समय: रात 03 बजकर 56 मिनट तक (11 अगस्त)
चंद्रास्त का समय: सायं 05 बजकर 18 मिनट तक (11 अगस्त)
सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: कर्क राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: मिथुन राशि में (अगले दिन तड़के 04 बजकर 43 मिनट तक, 11 अगस्त तक), फिर कर्क राशि में प्रवेश
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक
अमृत काल: कोई नहीं
आज के अशुभ समय
राहुकाल: प्रातः 07 बजकर 27 मिनट से प्रातः 09 बजकर 07 मिनट तक
गुलिकाल: दोपहर 02 बजकर 06 बजे से सायं 03 बजकर 46 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक
खबरें और भी
आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव आर्द्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
आर्द्रा नक्षत्र: दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक, फिर पुनर्वसु
स्थान: 20°00’ मिथुन राशि से 3°20’ कर्क राशि तक
नक्षत्र स्वामी: बृहस्पतिदेव
राशि स्वामी: बुधदेव और चंद्रदेव
देवता: अदिति (देवताओं की माता)
प्रतीक: धनुष और तरकश
सामान्य विशेषताएं: अत्यंत ज्ञानी, आशावादी, आत्मविश्वासी, आकर्षक, आध्यात्मिक, भाग्यशाली, सरल स्वभाव, धार्मिक, कुशल वक्ता, दयालु और सहानुभूति रखने वाले।
सोम कृष्ण प्रदोष व्रत 2026
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 10 अगस्त, सुबह 08:00 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 11 अगस्त, सुबह 04 बजकर 54 मिनट तक
प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 07 बजकर 05 मिनट से रात 09 बजकर 14 मिनट तक
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक चंद्र मास की दोनों त्रयोदशी तिथियों को प्रदोष व्रत रखा जाता है। देखा जाए तो यह तिथि जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में आती है, तभी व्रत का दिन निश्चित होता है। विशेष रूप से सूर्यास्त के बाद त्रयोदशी और प्रदोष समय का मिलना भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत सटीक माना गया है।
ध्यान रहे कि जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं में सोम प्रदोष व्रत को भगवान शिव के सबसे प्रिय उपवासों में से एक माना गया है। इस पावन अवसर पर शिव पूजा करने से जीवन में शांति, सुख और संतुलन बढ़ता है।
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