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अक्षय तृतीया का महासंयोग: ऐसे करें मां लक्ष्मी की पूजा, सात पुश्तों तक नहीं होगी धन की कमी

Published: Fri, 17 Apr 2026 05:12 PM (GMT+05:30)

अक्षय तृतीया पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से अक्षय पुण्य फल मिलता है।

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर करें मां लक्ष्मी की ये खास पूजा। (Image Source: AI-Generated)

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर करें मां लक्ष्मी की ये खास पूजा। (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है

  2. इस दिन पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है

  3. इस साल यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर किए गए दान, पुण्य, स्नान और पूजा का फल कभी समाप्त नहीं होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है और दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

अगर आप भी चाहते हैं कि आपके घर में धन-धान्य की कभी कमी न हो, तो अक्षय तृतीया के इस महासंयोग पर मां लक्ष्मी की पूजा इस विशेष विधि से करें, जो इस प्रकार हैं -

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मां लक्ष्मी की पूजा विधि (Lakshmi Puja Vidhi)

  • संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  • चौकी की स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इस पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। साथ ही श्रीयंत्र या कुबेर यंत्र भी रखें।
  • पूजा सामग्री: मां लक्ष्मी को लाल गुलाब या कमल का फूल चढ़ाएं। साथ ही सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, हल्दी की गांठ और कौड़ियां भी चढ़ाएं।
  • दीपक: गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और मां लक्ष्मी के सामने रखकर 11 या 21 बार "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का जप करें।
  • स्तोत्र: इसके बाद श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
  • भोग: मां लक्ष्मी को दूध से बनी खीर, बताशे या मखाने का भोग लगाएं।
  • आरती: अंत में आरती करें और शंख बजाएं।

।।श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र।।

आदि लक्ष्मी

सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि चंद्र सहोदरि हेममये ।

मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायिनी मंजुल भाषिणि वेदनुते ।

पङ्कजवासिनि देवसुपूजित सद-गुण वर्षिणि शान्तिनुते ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनि आदिलक्ष्मि परिपालय माम् ।

धान्य लक्ष्मी:

अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि वैदिक रूपिणि वेदमये ।

क्षीर समुद्भव मङ्गल रुपिणि मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।

मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते ।

जय जय हे मधुसूदनकामिनि धान्यलक्ष्मि परिपालय माम् ।

धैर्य लक्ष्मी:

जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि मन्त्र स्वरुपिणि मन्त्रमये ।

सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते ।

भवभयहारिणि पापविमोचनि साधु जनाश्रित पादयुते ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनि धैर्यलक्ष्मि सदापालय माम् ।

गज लक्ष्मी:

जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि वैदिक रूपिणि वेदमये ।

रधगज तुरगपदाति समावृत परिजन मंडित लोकनुते ।

हरिहर ब्रम्ह सुपूजित सेवित ताप निवारिणि पादयुते ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनि गजलक्ष्मि रूपेण पालय माम् ।

सन्तान लक्ष्मी:

अयि खगवाहिनी मोहिनि चक्रिणि रागविवर्धिनि ज्ञानमये ।

गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि सप्तस्वर भूषित गाननुते ।

सकल सुरासुर देव मुनीश्वर मानव वन्दित पादयुते ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनि सन्तानलक्ष्मि परिपालय माम् ।

विजय लक्ष्मी:

जय कमलासनि सद-गति दायिनि ज्ञानविकासिनि गानमये ।

अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसर भूषित वसित वाद्यनुते ।

कनकधरास्तुति वैभव वन्दित शङ्करदेशिक मान्यपदे ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनि विजयक्ष्मि परिपालय माम् ।

विद्या लक्ष्मी:

प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये ।

मणिमय भूषित कर्णविभूषण शान्ति समावृत हास्यमुखे ।

नवनिद्धिदायिनी कलिमलहारिणि कामित फलप्रद हस्तयुते ।

जय जय हे मधुसूदन कामिनि विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम् ।

धन लक्ष्मी:

धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमि-दिन्धिमी दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये ।

घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम शङ्ख निनाद सुवाद्यनुते ।

वेद पुराणेतिहास सुपूजित वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते ।

जय जय हे कामिनि धनलक्ष्मी रूपेण पालय माम् ।

अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।

विष्णुवक्षःस्थलारूढे भक्तमोक्षप्रदायिनी ।।

शङ्ख चक्र गदाहस्ते विश्वरूपिणिते जयः ।

जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलम शुभ मङ्गलम ।

। इति श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम सम्पूर्णम ।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारीविभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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