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    इसलिए अक्षय तृतीया को कहा जाता है 'अबूझ मुहूर्त', इस दिन नहीं होती पंचांग देखने की जरुरत

    Updated: Wed, 08 Apr 2026 09:06 AM (IST)

    अक्षय तृतीया को आखा तीज भी कहा जाता है, जो हिंदू पंचांग के सबसे शुभ दिनों में से एक है। ...और पढ़ें

    अक्षय तृतीया क्यों है एक अबूझ मुहूर्त (Picture Credit- AI Generated)

    अक्षय तृतीया क्यों है एक अबूझ मुहूर्त (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. अक्षय तृतीया को माना जाता है अबूझ मुहूर्त

    2. अक्षय रहता है इस दिन शुभ कार्यों का पुण्य

    3. बिना मुहूर्त देखे होते हैं विवाह, मुंडन जैसे कार्य

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया मनाई जाती है। इस बार यह पर्व 19 अप्रैल को मना जाएगा। माना जाता है कि अक्षय तृतीया पर किए गए शुभ कार्यों से मिलने वाले पुण्य का कभी क्षय (नाश) नहीं होता। साथ ही इस तिथि को अबूझ मुहूर्त के रूप में भी जाना जाता है। चलिए जानते हैं इस बारे में।

    अक्षय तृतीया का महत्व

    हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को सौभाग्य एवं सफलता प्रदान करने वाली तिथि माना गया है। इस दिन पर किए गए जप-तप, यज्ञ, पितृ-तर्पण और दान-पुण्य आदि से जातक को पुण्य मिलता है, जिसका प्रभाव जीवनभर कम नहीं होता। साथ ही अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का भी विशेष महत्व है, इसे सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

    इतना ही नहीं, हिंदू धर्म के साथ-साथ इस पर्व को जैन धर्म में भी अत्यंत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि जैन धर्म के पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभनाथ ने वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर ही इक्षु रस (गन्ने का रस) से व्रत का पारण किया था।

    क्या होता है अबूझ मुहूर्त

    हिंदू धर्म में कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य बिना शुभ मुहूर्त के नहीं किया जाता। यह माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किया गया काम व्यक्ति को शुभ फल प्रदान करता है। ऐसे में अबूझ मुहूर्त पवित्र और शुभ दिन होते हैं, जिनमें कोई भी मांगलिक व शुभ काम करने के लिए ज्योतिषीय गणना, पंचांग या शुभ समय देखने की जरुरत नहीं होती। इन्हें स्वयंसिद्ध मुहूर्त भी कहा जाता है।

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    Akshaya Tritiya i

    (Picture Credit- AI Generated)

    इसलिए कहलाता है अबूझ मुहूर्त

    शास्त्रों के अनुसार, अक्षय तृतीया एक ऐसी तिथि है, जब आप विवाह और अन्य शुभ काम ज्योतिषीय गणना या पंचांग में शुभ समय देखे बिना कर सकते हैं। ऐसे में यह तिथि उन जोड़ों के विवाह के लिए उत्तम मानी गई है, जिनकी कुंडली में ग्रह दोष या गुण मिलान में समस्या के कारण विवाह की तारीख तय नहीं हो पाती।

    इसलिए अक्षय तृतीया को एक अबूझ मुहूर्त माना जाता है। 'अबूझ मुहूर्त' होने के कारण अक्षय तृतीया पर शादी के अलावा सगाई, मुंडन और नामकरण जैसे शुभ व मांगलिक कार्य भी किए जाते हैं। साथ ही यह तिथि किसी नए काम की शुरुआत के लिए भी बहुत भी उत्तम मानी गई है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।