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    Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी पर करें ये काम, शिव जी बरसाएंगे अपनी कृपा

    Updated: Thu, 19 Feb 2026 03:24 PM (IST)

    हिंदू कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन महीने के शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi 2026) कहा जाता है, जिसे काशी में रंगभरी एकादशी के रूप में मना ...और पढ़ें

    Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी पर करें ये काम।

    Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी पर करें ये काम।

    HighLights

    1. आमलकी एकादशी का दिन बेहद शुभ माना जाता है

    2. इस दिन पूजा-पाठ और व्रत का विधान है

    3.  इस साल यह 27 फरवरी को पड़ेगी

    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है, लेकिन काशी में इसे 'रंगभरी एकादशी' के रूप में मनाया जाता है। यह साल की ऐसी एकादशी है जब भगवान विष्णु के साथ-साथ देवों के देव महादेव की भी पूजा होती है। इस साल यह 27 फरवरी को पड़ेगी। मान्यता है कि इसी दिन (Amalaki Ekadashi 2026) भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे। वहीं, इस दिन लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ परम कल्याणकारी माना गया है, जो इस प्रकार है -

    Mahashivratri katha 1

    Ai Generated Image

    लिंगाष्टकम स्तोत्र (Shiv Lingastakam Stotra)।।

    ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।

    जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥

    देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।

    रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥२॥

    सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।

    सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥३॥

    कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।

    दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥४॥

    कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।

    सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥५॥

    देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।

    दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥६॥

    अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।

    अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥७॥

    सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।

    परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥८॥

    लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।

    शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

    ॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥

    नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,

    भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।

    नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,

    तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥॥

    मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,

    नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।

    मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,

    तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥॥

    शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,

    सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।

    श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,

    तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥॥

    वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,

    मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।

    चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,

    तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥॥

    यक्षस्वरूपाय जटाधराय,

    पिनाकहस्ताय सनातनाय ।

    दिव्याय देवाय दिगम्बराय,

    तस्मै य काराय नमः शिवाय ॥॥

    पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।

    शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥

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