हनुमान चालीसा की रचना से जुड़ी अद्भुत कहानी, पढ़ें तुलसीदास जी की भक्ति और बजरंगबली की शक्ति का रहस्य
हनुमान चालीसा के लिखे जाने की कहानी बहुत विशेष है। जानिए गोस्वामी तुलसीदास जी की भक्ति, हनुमान जी की शक्ति और इस पवित्र रचना के पीछे छिपी धार्मिक मान् ...और पढ़ें

हनुमान चालीसा संकटों से मुक्ति और मन को शांति प्रदान करती है। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हम किसी संकट में हों, किसी बात का डर सता रहा हो या फिर किसी परेशानी से बाहर निकलने का रास्ता न मिल रहा हो। हनुमान चालीसा पढ़कर इन सभी समस्याओं का हल नजर आने लग जाता है। हनुमान चालीसा को हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध और श्रद्धा से पढ़ा जाने वाला पाठ माना गया है। भक्तों का विश्वास है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन को शांति मिलती है और कठिन समय में साहस प्राप्त होता है।
हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। लेकिन हनुमान चालीसा जितनी दिव्य है, उतनी ही रोचक है इसे लिखे जाने की कथा। चलिए हम आपको बताते हैं, इससे जुड़ी एक रोचक कहानी, जिसका जिक्र अंग्रेजी इतिहासकार विन्सेंट स्मिथ ने अपनी किताब 'अकबर द ग्रेट मुगल' के पेज 417 और 420 के बीच भी किया है।
हनुमान चालीसा के रचयिता
16वीं शताब्दी में हनुमान चालीसा की रचना महान संत और भगवान श्रीराम के परम भक्त गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। तुलसीदास जी ने अपना पूरा जीवन भगवान श्री राम की भक्ति में समर्पित कर दिया था। उन्होंने कई धार्मिक ग्रंथों की रचना की, जिनमें हनुमान चालीसा भी बहुत प्रसिद्ध है। इस चालीसा में 40 चौपाइयां हैं। जिसमें हनुमान जी की शक्ति, गुण और भक्ति का वर्णन किया गया है।
अकबर और तुलसीदास जी की कथा
मान्यता के अनुसार, एक बार मुगल बादशाह अकबर ने तुलसीदास जी को अपनी सभा में बुलाया। अकबर ने तुलसीदास जी की प्रसिद्धि के बारे में सुना था और उनसे मिलने की इच्छा जताई थी। कुछ कथाओं के अनुसार, सभा में किसी कारण से अकबर को तुलसीदास जी के ऊपर क्रोध आ गया और उन्हें बंदी बना लिया गया। इसके बाद तुलसीदास जी को कारागृह में रखा गया।
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कारागृह में हनुमान चालीसा की रचना
जब तुलसीदास जी कारागृह में थे, तब उन्होंने भगवान हनुमान जी का स्मरण किया। उन्होंने लगातार चालीस दिनों तक प्रतिदिन एक चौपाई की रचना की। इस प्रकार धीरे-धीरे हनुमान चालीसा पूरी हुई। तुलसीदास जी ने अपनी भक्ति और विश्वास के साथ इस चालीसा में हनुमान जी का गुणगान किया।
हनुमान जी की कृपा की मान्यता
कथा के अनुसार, जब चालीस दिनों के बाद हनुमान चालीसा पूरी हुई, तब अचानक फतेहपुर सीकरी में बहुत सारे बंदरों ने हमला कर दिया। बंदरों के इस हमले से वहां परेशानी बढ़ गई और अकबर की सेना भी उन्हें रोक न सकी। उस समय अकबर को राजा के एक दरबारी ने सलाह दी कि तुलसीदास जी को मुक्त कर देना चाहिए। दरबारी की इस सलाह को माना गया ।
तुलसीदास जी की मुक्ति
कहा जाता है कि जैसे ही तुलसीदास जी को कारागृह से छोड़ा गया, बंदर भी वहां से चले गए। इस घटना के बाद लोगों ने तुलसीदास जी की भक्ति और हनुमान जी की शक्ति को माना। इतना ही नहीं, तब से ही हनुमान चालीसा भी भक्तों के मध्य प्रचलित हो गई। आज जब भी कोई संकट की घड़ी आती है या फिर किसी बात का डर सताता है भक्त श्री हनुमान जी की इस चालीसा को पढ़ कर शांति का अनुभव करते हैं।
अत: हनुमान चालीसा केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है, बल्कि यह भक्ति, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम भी है।
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