मुक्तकेशी से लेकर जटा तक: जानिए प्राचीन भारत के 7 प्रमुख हेयरस्टाइल और उनके गहरे अर्थ
प्राचीन भारत में केशविन्यास केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि अनुशासन और सामाजिक स्थिति का भी प्रतीक थे। मुक्तकेशी, एकवेणी, द्विवेणी और जटा जैसे विभिन्न हेय ...और पढ़ें

प्राचीन भारत के प्रमुख हेयरस्टाइल (AI-generated image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको पता है कि, प्राचीन भारत में बाल केवल सुंदरता की निशानी ही नहीं, बल्कि अनुशासन का भी प्रतीक थी। अप्सराओं के लहराते बालों से लेकर तपस्वियों के कसकर बंधी जटाधारी बाल, ये केशविन्यास (Hair Style) मात्र सजावटी के लिए नहीं थे, बल्कि सामाजिक स्थिति से लेकर आध्यात्मिक साधना को दर्शाते थे।
प्राचीन ग्रंथों और संस्कृति के साहित्य में खुले बाल को (मुक्तकेशी), एक चोटी को (एकवेणी), दो चोटियों को (द्विवेणी), लहराते हुए बाल (कुंतला), चेहरे के पास एक घुंघराला बाल (अलका) और उलझे हुए बालों को (जटा) बताया गया है। आइए जानते हैं विस्तार से केशविन्यास के बारे में।

मुक्तकेशी (खुले बालों वाली महिला)
पवित्र संस्कृति साहित्य और तस्वीरों में मुक्तकेशी को सुंदरता, तेजी, दुख, तपस्वी शक्ति और भयंकर दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। हिंदू शास्त्रों में मुक्तकेशी खासतौर पर देवी काली या मां दुर्गा का ही एक अन्य नाम है, जिनके बाल खुले और बिखरे होते हैं।

एकवेणी (एक चोटी वाली)
प्राचीन संस्कृति शास्त्रों में एक चोटी सुरुचिपूर्ण, सरलता और अनुशासन को दर्शाता है। प्राचीन काल में एकवेणी को क्लासिक हेयरस्टाइल माना जाता था। हिंदू धर्म में एकवेणी बाल मां कालरात्रि के हैं।

द्विवेणी (दो चोटियां)
द्विवेणी से तात्पर्य है, बाल दो लंबी चोटियों में बंटे हुए। यह हेयरस्टाइल जितना प्राचीन काल में सुंदर, सरल और रोजमर्रा के जीवन में गहराई से जुड़ा था, आज भी उतना ही है। द्विवेणी हेयरस्टाइल छोटी लड़कियों से लेकर कई मूर्तियों में देवियों तक देखने को मिलता है।
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मंडलितवेणी (कुंडलित चोटी)
संस्कृति साहित्यिक से जुड़ा एक शब्द मंडलितवेणी जिसका मतलब होता है, गोलाकार आकृति में आपस में गूंथी हुई चोटी, जो दो शब्दों के मेल से बना है।
मंडलित- ऐसे बाल जो आपस में लपेटे हुए हो वृत्त या गोलाकार आकृति में
वेणी का मतलब बालों की चोटी या आपस में गुंथे हुए बाल होते हैं।

अलका (चेहरे के पास घुंघराले बाल)
प्राचीन संस्कृति साहित्य में अलका कोई संपूर्ण हेयर स्टाइल नहीं है, बल्कि मात्र एख कर्ल (घुंघराले) बाल हैं, जो गाल के पास गिर रहा है। एक कर्ल बाल कभी-कभी सुंदरता बताने के लिए काफी होता है।

कुंतल (लहराते हुए बाल)
प्राचीन शास्त्रों के मुताबिक, कुंतल बहते हुए पानी जैसे प्रतीत होते हैं। जो दिखने में काफी मुलायम, लहराते हुए नजर आते हैं। प्राचीन शास्त्रों में इस हेयर स्टाइल को महिलाओं के मूवमेंट, फेमिनिनिटी और जिंदगी से जोड़कर देखा जाता था।

जटा (जुड़ा)
प्राचीन संस्कृति साहित्य और काल और आज भी जटाधारी पुरुष और महिला को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। क्योंकि इतने लंबे बाल बड़े करना और उन्हें बढ़ते देना अपने आप में एक अनुशासन है। हिंदू धर्म में ऋषियों, तपस्वियों और कई देवताओं को भी इस हेयरस्टाइल में देखा जा सकता है।
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