आखिर शास्त्रों में मां को भगवान से भी ऊपर क्यों रखा गया है? गरुड़ पुराण का यह सच आंखें खोल देगा
सनातन धर्म में माता को ईश्वर से भी बड़ा दर्जा दिया गया है, जिनके सम्मान से व्यक्ति को असीम सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है। जानते हैं माता का सम् ...और पढ़ें
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हिंदू धर्म शास्त्रों में मां की सेवा करने का महत्व (Picture Credits- AI Image)
HighLights
सनातन धर्म में माता-पिता ईश्वर से भी बड़े माने जाते हैं।
मां का सम्मान करने से सुख-समृद्धि और शांति मिलती है।
गरुड़ पुराण अनुसार मां का अनादर करने पर कष्ट भोगने पड़ते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म और संस्कृति में माता-पिता को ईश्वर से भी बड़ा माना जाता है। हिंदू शास्त्र से जुड़े ऐसे कई पुराण हैं, जिनमें मानव हित की बात की गई है। जो व्यक्ति अपनी मां का सम्मान करता है, उसे शुभ फल और शिक्षा प्राप्त होत है। आइए जानते हैं माता का सम्मान करने से कौन-से शुभ फल प्राप्त होते हैं?
माना जाता है कि, मां के दिल से निकली हर बात सच साबित होती है। अगर मां हृदय से आदर करती है, तो न सिर्फ असीम मानसिक शांति बल्कि अपार सुख-समृद्धि और यश की प्राप्ति होती है। हिंदू शास्त्रों में मां को प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है। जो भी व्यक्ति अपनी माता का सम्मान करता है, वह जीवन में कभी भी अपना मार्ग नहीं भटकता और हर समस्या का पार कर लेता है।
गरुड़ पुराण में माता-पिता की सेवा को लेकर एक श्लोक का वर्णन किया गया है कि,
पितृमातृसमंलोके नास्त्यन्यद दैवतं परम्।
तस्मात सर्वप्रयत्नेन पूजयते् पितरौ सदा।।
हितानमुपदेष्टा हि प्रत्यक्षं दैवतं पिता।
अन्या या देवता लोक में देहेप्रभवो हिता :।।
अर्थात्- इस संसार में माता-पिता से बढ़कर देवता भी नहीं है। मनुष्य को सभी तरह से अपने माता-पिता की सेवा और पूजा करनी चाहिए। इस संसार में जो देवता हैं, वो शरीरधारी नहीं हैं, लेकिन माता-पिता प्रत्यक्ष देवता हैं। इनकी सेवा करने ही सबसे बड़ा धर्म है। श्री वाल्मीकि रामायण में भी माता-पिता और गुरु को प्रत्यक्ष ईश्वर मानकर सेवा और सम्मान करने का उपदेश दिया गया है।
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माता का सम्मान न करने पर क्या सजा मिलती है?
गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति जन्म देने वाली माता का सम्मान नहीं करता है, उसे मरने के बाद भी काफी कष्ट का सामना करना पड़ सकता है। माना जाता है कि, ऐसे लोगों की आत्मा को मरने के बाद नर्क की नदी वैतरणी में डाल दिया जाता है। नर्क की वैतरणी नदी के बारे में कहा जाता है कि, इसमें पानी की जगह खून होता है, जो लावे के समान उबलता है।
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माता के सम्मान का महत्व
गरुड़ पुराण की शिक्षाओं अनुसार, जो संतान अपनी माता का सम्मान करती है, उनकी सेवा करती है और उन्हें खुश रखती है, ऐसे व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का विकास होता है। माता का आशीर्वाद संतान को उचित मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करती है।
हिंदू धर्म में माता की सेवा और सम्मान को महान पुण्य कर्मों में शामिल किया गया है। इस बात को याद रखें कि, जिस भी घर में माता का सम्मान, सेवा और पूजा जाता है, वहां शांति, प्रेम और मंगल का वास होता है।
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