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    वैष्णो देवी से लेकर मैहर तक: आखिर ऊंचे पहाड़ों पर ही क्यों विराजमान हैं माता रानी?

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 06:00 PM (IST)

    देवी मां के अधिकतर मंदिर ऊंचे पहाड़ों पर क्यों स्थित होते हैं। इसके पीछे शांति, एकांत और देवी भागवत में वर्णित कथाएं प्रमुख कारण हैं। ...और पढ़ें

    माता रानी का निवास स्थान पहाड़ों पर ही क्यों है? (Picture Credits- AI Image)

    माता रानी का निवास स्थान पहाड़ों पर ही क्यों है? (Picture Credits- AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब कभी भी ऊंचे पहाड़ों पर बने मंदिरों की बात की जाती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले कश्मीर में स्थित वैष्णो देवी मंदिर फिर हिमाचल में स्थित मां ज्वाला देवी का मंदिर, मां नयना देवी का मंदिर, मध्य प्रदेश की मैहर वाली माता, छत्तीसगढ़ की बम्लेश्वरी देवी आदि का नाम आता है।

    अब ऐसे में एक सवाल उठता है कि, देवी मां के ज्यादातर मंदिर पहाड़ों पर ही क्यों बसे हैं; आखिर पहाड़ों पर ऐसा क्या है, जो समतल जमीन पर नहीं है? इसके पीछे कई तरह की कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं।

    पहाड़ों पर शांति और एकांत का वास 

    प्राचीन काल में ऋषि-मुनि ऐसे स्थानों पर तपस्या के जरिए सिद्धि हासिल कर इनका इस्तेमाल मनुष्यों के कल्याण के लिए करते थे। पहाड़ों पर शांति और एकांत का वातावरण होता है।

    धरती पर इंसान पहाड़ों की जगह समतल जमीन को प्राथमिकता देते हैं। इसी एकांत और गहरी शांति ने देवी मंदिरों के लिए पहाड़ों को महत्व दिया।

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    देवी भागवत में क्या कहा गया है? 

    पहाड़ों पर देवी के मंदिर बसे होने के पीछे एक ओर प्रचलित कथा है। देवी भागवत, मार्केण्ड पुराण में बताया गया है कि, देवताओं के स्तुति करने पर देवी मां हिमालय की शिखर पर प्रकट हुई। देवी मां सिर्फ मनुष्यों की ही मां नहीं है, बल्कि देवताओं की भी मां सामान है। देवताओं के लोक मनुष्यों लोक से ऊपर होते हैं। ऐसे में पहाड़ों के शिखर देवताओं और मनुष्यों दोनों के पहुंचने के लिए योग्य हैं। इसलिए जगत की माता का निवास पहाड़ों पर बताया जाता है।

    सनातन शास्त्रों में पहाड़ 'भू भव स्वाहा' तीनों लोकों के केंद्रीय पहुंच को दर्शाता है और योग भी हमारे शरीर में मेरु पर्वत माना गया है, जिसका आधार पर सुप्त कुंडलिनी ऊर्जा होती है, जिसका असल उद्देश्य होता है शिखर तक पहुंचना। मां का आशीर्वाद शारीरिक और आध्यात्मिक कोशिशें से प्राप्त होती है और पहाड़ों को चढ़ना इसी कोशिश को दर्शाता है।

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