डर नहीं, न्याय का प्रतीक: सरमा और उसके दो बच्चों की कहानी, जो बदल देगी कुत्तों को देखने का आपका नजरिया
सनातन परंपरा में सरमा को सभी पवित्र कुत्तों की माता माना जाता है, जिन्होंने इंद्र को दिव्य गायें ढूंढने में मदद की थी। उनके पुत्र श्याम और सबला को यम ...और पढ़ें

श्यामा और सबला यमराज के दो दिव्य कुत्तों की कथा (Picture Credits- AI Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन परंपरा में कुत्ते को सिर्फ एक साधारण पशु नहीं बल्कि सतर्कता, निष्ठा और धर्म की रक्षा करने वाला जानवर माना जाता है। ऋग्वेद में वर्णित सरमा एक ऐसी ही दिव्य कुतिया जिन्हें सभी पवित्र कुत्तों की माता भी कहा जाता है। उनसे जुड़ी कथा सिर्फ साहस और बहादुरी की नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना और ब्रह्मांडीय संतुलन को भी दर्शाती है।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक समय पणि नाम के राक्षस ने देवताओं की दिव्य गायों को अगवा कर उन्हें एक गुप्त गुफा में छिपा दिया था। ये गायें सिर्फ पशु नहीं थीं, बल्कि समृद्धि, यज्ञ, पोषणता और धार्मिक व्यवस्था का भी प्रतीक थीं। उनके गायब हो जाने से यज्ञ बाधित हो गया और पृथ्वी का संतुलन तक बिगाड़ गया।
इंद्र ने गाय ढूंढने का का सरमा को दिया
गायों को ढूंढने के लिए देवराज इंद्र ने सबसे विश्वसनीय दूत सरमा को गायों को खोजने का काम दिया। सरमा जो समझदार और साहसी कुतिया थी, बिना किसी मार्गदर्शक या नक्शे के पर्वत, रेगिस्तान, जंगल और नदियों को पार कर आखिर में उसने असुरों की गुप्त गुफा खोज ली, जहां उसने दिव्य गायों को छिपाया हुआ था।

जब पणि राक्षस को सरमा के बारे में पता चला तो, उसने उसे धन, वैभव और शक्ति का लालच देकर अपने पक्ष में मिलाने की कोशिश की, लेकिन सरमा ने धर्म का साथ नहीं छोड़ा। सरमा की निष्ठा को देखकर इंद्रराज समेत स्वर्ग के सभी देवताओं ने उस स्थान पर आक्रमण कर गायों को मुक्त कराया और संसार में एक बार फिर से समृद्धि और धार्मिक व्यवस्था स्थापित हुई। इसलिए सरमा को सत्य, कर्तव्य और अडिग निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
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सरमा के दो दिव्य पुत्र सबला और श्यामा
पौराणिक कथा के मुताबिक, सरमा को दो दिव्य पुत्रों की प्राप्ति हुई, जिनका नाम श्याम और शबल (कहीं-कहीं इन्हें श्यामा और सबला के नाम से जाना जाता है) शास्त्रों में इन दोनों कुत्तों को यम के चार आंखों वाले कुत्ते के रूप में वर्णित किया जाता है।
इनकी चार आंख इस बात का प्रतीक है कि, वे सिर्फ बाहरी दृष्टि ही नहीं, बल्कि सूक्ष्म और आध्यात्मिक दृष्टिवान भी हैं। वे मृत आत्माओं के मार्ग की रक्षा करते हैं, उन्हें सही दिशा बताते हैं। धार्मिक मत के अनुसार ये दोनों ही कुत्ते मृत आत्माओं को यमलोक तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

भारतीय अध्यात्म में यम के ये दिव्य कुत्ते डर का नहीं, बल्कि न्याय और व्यवस्था का प्रतीक माने जाते हैं। इस तरह सरमा और उनके पुत्रों की कहानी भारतीय संस्कृति में कुत्तों के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाती है। यह कहानी इस बात पर जोर देती है कि, सच्ची निष्ठा, कर्तव्य और धर्म के प्रति समर्पण ही व्यक्ति को दिव्यता के सबसे करीब ले जाती है।
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