पहले बड़े मंगल पर शिवलिंग पर चढ़ा दें ये खास चीजें, महादेव और हनुमान जी दोनों की बरसेगी कृपा!
ज्येष्ठ के पहले बड़े मंगल पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए? आइए यहां जानते हैं। ...और पढ़ें

Bada Mangal Shubh Sanyog: बड़ा मंगल के उपाय। (Ai Generated Image)
HighLights
हनुमान जी शिव के रुद्रावतार हैं
बड़े मंगल पर शिव पूजा से दोगुना शुभ फल मिलता है
इस दिन शिवलिंग पर कुछ खास चीजें चढ़ाने से रुके हुए काम पूरे होते हैं
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्येष्ठ महीने के मंगलवार का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व हैं, जिन्हें 'बड़े मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' के नाम से जाना जाता है। यह दिन संकटमोचन हनुमान जी की विशेष उपासना के लिए समर्पित है। हनुमान जी भगवान शिव के ही 11वें रुद्रावतार माने जाते हैं, इसलिए बड़े मंगल के शुभ अवसर पर शिवलिंग की पूजा करना न केवल महादेव को प्रसन्न करता है, बल्कि बजरंगबली की भी कृपा दिलाता है, तो आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि पहले बड़े मंगल पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?

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शिवलिंग पर अर्पित करें ये सामग्री
- लाल चंदन और लाल पुष्प - भगवान शिव को वैसे तो सफेद चीजें प्रिय हैं, लेकिन हनुमान जी के दिन यानी बड़े मंगल पर शिवलिंग पर लाल चंदन का लेप लगाना और लाल गुलाब या गुड़हल के फूल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। यह मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है।
- तांबे के लोटे से जल और अक्षत - तांबे के पात्र में गंगाजल भरकर उसमें थोड़े से अक्षत मिलाएं और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए शिवलिंग पर चढ़ाएं।
- बिल्व पत्र और बेसन के लड्डू - महादेव को बिल्व पत्र अर्पित करें और साथ ही हनुमान जी के प्रिय बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इस भोग को बाद में प्रसाद के रूप में बांटने से घर में सुख-शांति आती है।
पूजन के नियम
- स्नान के बाद लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
- ध्यान रखें कि हनुमान जी को तुलसी प्रिय है, लेकिन शिवलिंग पर तुलसी दल कभी न चढ़ाएं, क्योंकि यह वर्जित माना गया है।
- शिवलिंग के सामने बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करना और अंत में शिव जी व हनुमान जी की आरती करना बहुत फलदायी होता है।
- पूजा के बाद सभी गलतियों के लिए माफी मांगे।
शिव पूजा मंत्र
- ॐ नमः शिवाय॥
- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात॥
- वंदे देव उमापतिं सुरगुरुं वंदे जगत्कारणं, वंदे पन्नगभूषणं मृधरं वंदे पशूनां पतिम्॥
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।