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    कब है Bhalchandra Sankashti Chaturthi? नोट करें चंद्रोदय का समय और पूजा का शुभ मुहूर्त

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 05:37 PM (IST)

    चैत्र मास अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसमें चैत्र नवरात्र और भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं। यह मास मां दुर्गा और भगवान गणेश को स ...और पढ़ें

    Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

    Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

    HighLights

    1. चैत्र महीने में कामदा एकादशी मनाई जाती है।

    2. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

    3. भगवान विष्णु की पूजा से हर कामना पूरी होती है।  

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र का महीना बेहद शुभ और मंगलकारी होता है। यह महीन जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस माह के शुक्ल पक्ष में चैत्र नवरात्र मनाया जाता है। चैत्र नवरात्र के दौरान देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त नवरात्र का व्रत रखा जाता है।

    ganesh ji

    चैत्र महीने की शुरुआत बुधवार 04 मार्च से हो रही है। इस माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही चतुर्थी तिथि का व्रत भी रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। आइए, चैत्र माह की चतुर्थी की सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानते हैं-

    भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Bhalchandra Sankasthi Chaturthi Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार 06 मार्च को शाम 05 बजकर 53 मिनट पर चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत होगी और 07 मार्च को शाम 07 बजकर 17 मिनट पर चतुर्थी तिथि समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। इस प्रकार 06 मार्च को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर चन्द्रोदय का समय रात 09 बजकर 14 मिनट पर है।

    भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी शुभ योग (Bhalchandra Sankasthi Chaturthi Shubh Muhurat)

    ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर एक साथ कई शुभ और मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान गणेश की पूजा करने से साधक की हर परेशानी दूर होगी। इनमें वृद्धि योग का संयोग दिन भर है। इसके साथ ही भद्रावास योग का भी संयोग बन रहा है।

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    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 41 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 24 मिनट पर
    • चन्द्रोदय- रात 09 बजकर 14 मिनट पर
    • चन्द्रास्त- सुबह 08 बजकर 01 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 03 मिनट से 05 बजकर 52 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 16 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 21 मिनट से 06 बजकर 46 मिनट तक
    • निशिता मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक

    गणेश मंत्र

    1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।
    निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥

    2. ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥

    3. 'गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
    नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
    धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
    गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।

    4. ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

    5. दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
    धृताब्जयालिङ्गितमाब्धि पुत्र्या-लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।