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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 05, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Sankashti Chaturthi 2025: संकष्टी चतर्थी पर ध्रुव योग समेत बन रहे हैं कई मंगलकारी योग, मिलेगा अक्षय फल

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Wed, 05 Mar 2025 10:00 PM (IST)

    सनातन धर्म में चैत्र माह का खास महत्व है। यह महीना मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस महीने में चैत्र नवरात्र मनाया जाता है। इस माह के कृष्ण पक्ष की चत ...और पढ़ें

    Sankashti Chaturthi 2025: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर क्या करें और क्या न करें?
    Sankashti Chaturthi 2025: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर क्या करें और क्या न करें?

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस शुभ तिथि पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है। साथ ही साधक शुभ कामों में सफलता पाने के लिए चतुर्थी का व्रत रखते हैं। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही आर्थिक तंगी से भी मुक्ति मिलती है। इस शुभ अवसर भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है।

    ज्योतिषियों के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान गणेश की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। साथ ही साधक पर भगवान गणेश की कृपा बरसेगी। उनकी कृपा से घर में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली आएगी। आइए, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की डेट, शुभ मुहूर्त और योग के बारे में जानते हैं।

    भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2025 शुभ मुहूर्त (Sankashti Chaturthi 2025 Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 मार्च को रात 07 बजकर 33 मिनट से लेकर 18 मार्च को रात 10 बजकर 09 मिनट तक है। चतुर्थी तिथि पर चंद्रोदय के समय पूजा की जाती है। इसके लिए 17 मार्च को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी।

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    भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी शुभ योग

    ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का समापन दोपहर 03 बजकर 45 मिनट पर होगा। ध्रुव योग में भगवान गणेश की पूजा करने से शुभ कामों में सफलता मिलती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसके साथ ही भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर भद्रावास योग का भी संयोग बन रहा है। भद्रावास योग शाम 07 बजकर 33 मिनट तक है। वहीं, भद्रावास योग के बाध शिववास योग का संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान गणेश की पूजा करने सकल मनोरथ सिद्ध होंगे।

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    पंचांग

    • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 28 मिनट पर
    • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 31 मिनट पर
    • चन्द्रोदय - सुबह 09 बजकर 18 मिनट पर
    • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 53 मिनट से 05 बजकर 41 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक
    • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 28 मिनट से 06 बजकर 52 मिनट तक
    • अमृत काल- सुबह 07 बजकर 34 मिनट से 09 बजकर 23 मिनट तक

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।