भाद्रपद में बरसेगी शिव कृपा, डायरी में अभी नोट कर लें भौम और बुध प्रदोष व्रत की सही डेट और शुभ मुहूर्त
भाद्रपद मास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत की तिथियां और शुभ मुहूर्त यहां दिए गए हैं। 08 सितंबर को भौम ...और पढ़ें
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प्रदोष व्रत से महादेव होते हैं प्रसन्न (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इसके अगले दिन से भाद्रपद मास की शुरुआत होगी। इस माह का समापन 26 सितंबर को होगा। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है।
इस दिन प्रदोष काल में महादेव के संग मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजन और व्रत करने से साधक को जीवन के सभी प्रकार के भय से छुटकारा मिलता है और शिव जी की अपार कृपा बरसती है। वहीं, अब कुछ ही दिनों में भाद्रपद मास की शुरुआत होने जा रही है, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि भाद्रपद में प्रदोष व्रत कब-कब है।
भाद्रपद माह में कब-कब है प्रदोष व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह में 08 सितंबर को पहला प्रदोष व्रत है। इस दिन मंगलवार है, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। वहीं, 23 सितंबर को शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत है। इस दिन बुधवार है, इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
भौम प्रदोष व्रत 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Bhaum Pradosh Vrat 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 08 सितंबर को सुबह 05 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 09 सितंबर को रात 3 बजे होगा। ऐसे में भौम प्रदोष व्रत 08 सितंबर को किया जाएगा। इस दिन पूजा करने का सही समय शाम 07 बजकर 28 मिनट से 09 बजकर 43 मिनट तक है।
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(Picture Credit- AI Generated)
बुध प्रदोष व्रत 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Budh Pradosh Vrat 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 23 सितंबर को दोपहर 01 बजकर 20 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 24 सितंबर को दोपहर 02 बजकर 28 मिनट पर होगा। ऐसे में बुध प्रदोष व्रत 23 सितंबर को किया जाएगा। इस दिन महादेव की पूजा करने का समय शाम को 07 बजकर 04 मिनट से 09 बजकर 26 मिनट तक है।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत के अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का बहुत महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक के अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और महादेव की कृपा से बिगड़े काम पूरे होते हैं। साथ ही, जीवन में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
