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    बुध प्रदोष पर बन रहा ब्रह्म और इंद्र योग का दुर्लभ संयोग, ऐसे लाएं जीवन में सुख-शांति

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 11:20 AM (IST)

    बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026 को है, जब ब्रह्म और इंद्र योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह दिन शिव पूजा के लिए अत्यंत शुभ है, जिससे बुद्धि, ज्ञान और व ...और पढ़ें

    बुध प्रदोष पर बन रहे कई मंगलकारी योग (AI Generated Image)

    बुध प्रदोष पर बन रहे कई मंगलकारी योग (AI Generated Image) 

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    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। बुध प्रदोष व्रत का पावन अवसर इस साल 15 अप्रैल 2026, बुधवार (Budh Pradosh Vrat  2026 Date) को आ रहा है। पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 10:31 बजे तक रहेगी, जो इस दिन को शिव पूजा के लिए अत्यंत फलदायी बनाती है।
    बुधवार के दिन प्रदोष व्रत का होना बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र दोपहर 03:22 बजे तक रहेगा, जिसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का आगमन होगा। यह पावन तिथि हमें सिखाती है कि यदि हम पूरे विश्वास के साथ महादेव की शरण में जाते हैं, तो हमारे जीवन के सभी मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं।

    shivling par kya chadaye

    (AI Generated Image) 

    ब्रह्म और इंद्र योग का दुर्लभ और मंगलकारी मेल

    इस बार बुध प्रदोष व्रत (Budh Pradosh Vrat  2026) पर दो अत्यंत शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। दिन के पहले हिस्से में ब्रह्म योग दोपहर 01:25 बजे तक रहेगा, जिसे आध्यात्मिक कार्यों और शांति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसके तुरंत बाद इंद्र योग का आरंभ होगा, जो राजकीय कार्यों और सफलता के लिए बहुत प्रभावशाली है। इन दोनों योगों का संगम भक्तों के लिए दोहरी खुशियां लेकर आया है। बुधवार का दिन होने के कारण बुध ग्रह की अनुकूलता भी प्राप्त होगी, जिससे शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्र में रुके हुए काम सहजता से पूरे होने लगेंगे। यह समय नई ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने का संकेत देता है।

    प्रदोष काल में शिव पूजन की सरल और शुद्ध विधि

    • प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा शाम को सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है।
    • सबसे पहले स्नान करके साफ और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
    • घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर पूजा का संकल्प लें।
    • शिवलिंग पर शुद्ध जल, कच्चा दूध और गंगाजल अर्पित करें।
    • भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल चढ़ाते हुए 'ओम नमः शिवाय' का जाप करें।
    • शिव जी के साथ मां पार्वती की भी आराधना करें, जिससे परिवार में प्रेम और तालमेल बना रहे।
    • पूजा के समापन पर शिव जी की आरती करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
    • शांत और पवित्र मन से की गई यह पूजा घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा लाती है।

    व्रत के दौरान संयम और मधुर व्यवहार का महत्व

    व्रत के दौरान अपने आचरण और वाणी की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन किसी से कड़वी बातें न करें और मन में केवल अच्छे विचार ही लाएं। घर में किसी भी तरह की अशांति न होने दें ताकि पूजा का पूरा फल मिल सके। खान-पान में सात्विकता बनाए रखें और संभव हो तो केवल फलहार ही ग्रहण करें। अपनी मधुर वाणी से सबका सम्मान करें और जरूरतमंदों की मदद करने का संकल्प लें। जब हम पवित्रता और संयम के साथ इन नियमों का पालन करते हैं, तो हमारे जीवन में खुशहाली आती है और हमें मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।

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