क्या पीरियड्स में रख सकते हैं चैत्र नवरात्र व्रत? पढ़ें मां दुर्गा की पूजा और कलश स्थापना के जरूरी नियम
चैत्र नवरात्र 2026 के बीच अगर पीरियड्स आ जाएं तो क्या व्रत रखना चाहिए? पढ़ें शास्त्रों के अनुसार, मानसिक पूजा और कन्या पूजन के नियम। ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र पूजा के नियम (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेक्स, नई दिल्ली। हर साल नवरात्र आते ही कई महिलाओं के मन में एक बहुत ही आम और जरूरी सवाल उठता है कि अगर नवरात्र के नौ दिनों के बीच में पीरियड्स (माहवारी) आ जाएं, तो क्या मेरा व्रत टूट जाएगा?
दरअसल, माहवारी एक प्राकृतिक और स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे खुद भगवान और प्रकृति ने बनाया है। इसलिए सबसे पहले तो इस बात को लेकर मन में कोई अपराध बोध (Guilt) या हीन भावना नहीं लानी चाहिए। ऐसी स्थिति के लिए हमारे नियम और शास्त्र क्या कहते हैं।
क्या पीरियड्स में व्रत रख सकते हैं?
अगर आपने 9 दिन का व्रत रखा है और बीच में पीरियड्स आ जाएं, तो अपना संकल्प न तोड़ें। आप अपना व्रत पहले की तरह ही जारी रख सकती हैं और फलाहार कर सकती हैं।
लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि, अगर माहवारी के दौरान आपको बहुत ज्यादा दर्द या कमजोरी (Weakness) महसूस हो रही है, तो अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। ईश्वर कभी नहीं चाहते कि आप खुद को तकलीफ देकर उपवास रखें।
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'मानसिक पूजा' का महत्व
'धर्म सिंधु' और अन्य स्मृति ग्रंथों (शास्त्रों) के अनुसार, सूतक या माहवारी की स्थिति में शारीरिक रूप से मंदिर जाना, भगवान की मूर्ति या पूजा सामग्री को छूना वर्जित माना गया है।
लेकिन, शास्त्रों में 'मानसिक पूजा' (मन ही मन भगवान का ध्यान करना) को सबसे श्रेष्ठ और पवित्र माना गया है। आप बिस्तर या कुर्सी पर बैठकर, मन ही मन मां दुर्गा के मंत्रों का जप (Maa Durga Mantra Jap) कर सकती हैं। आप चाहें तो मोबाइल पर दुर्गा सप्तशती या चालीसा का पाठ सुन सकती हैं। इसमें कोई दोष नहीं है।

(Image Source: AI-Generated)
कन्या पूजन के जरूरी नियम
- घर के मंदिर की सफाई, ज्योत जलाना और आरती जैसे कार्य स्वयं न करके परिवार के किसी अन्य सदस्य (जैसे पति, बच्चे या सास-ससुर) से करवाएं।
- अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के लिए बनाया जाने वाला प्रसाद (हलवा, पूरी, चना आदि) स्वयं न बनाएं। इसे घर का कोई दूसरा सदस्य तैयार कर सकता है।
- कन्याओं को भोजन कराने और उनके पैर छूने के बजाय, आप दूर से ही हाथ जोड़कर उन्हें श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें।
- शास्त्रों के अनुसार, इस तरह शुद्ध मन और श्रद्धा से किया गया व्रत और पूजन पूरी तरह सफल और पूर्ण माना जाता है।
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