क्या भगवान की भक्ति के लिए भारत में जन्म लेना जरूरी है? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया सच
प्रेमानंद जी महाराज ने स्पष्ट किया कि ईश्वर प्राप्ति के लिए भारत में जन्म लेना आवश्यक नहीं है। सच्ची भक्ति ...और पढ़ें

प्रेमानंद जी महाराज का दिव्य ज्ञान ईश्वर प्राप्ति के लिए जन्मस्थान का महत्व (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
जन्मस्थान नहीं, सच्ची भक्ति और भगवत भजन ईश्वर प्राप्ति का मार्ग।
प्रेमानंद जी महाराज ने रामचरितमानस की चौपाई से समझाया यह सत्य।
भारत में भक्ति का माहौल बेहतर, पर कहीं भी संभव सच्ची भक्ति।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। प्रेमानंद ही महाराज हमेशा से ईश्वर प्राप्ति के अलग-अलग रास्ते बताते हैं। उनके प्रवचन में न जाने कितनी ऐसी बातें बताई जाती हैं, जिनसे व्यक्ति भक्ति और आध्यात्म से जुड़ता है। लोग उनकी बातों का अनुसरण करके ही जीवन में आगे बढ़ते हैं और ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग मिलता है।
ऐसे ही संत प्रेमानंद जी से एक भक्त ने सवाल किया कि 'क्या ईश्वर की प्राप्ति के लिए भारत में जन्म लेना जरूरी है?'आइए आपको बताते हैं कि संत प्रेमानंद जी ने इसके बारे में क्या उत्तर दिया है?
ईश्वर भक्ति के लिए भारत में जन्म लेना कितना जरूरी?
भक्त के इस सवाल के जवाब में प्रेमानंद ही महाराज कहते हैं कि अगर किसी का जन्म वृंदावन में हुआ है, तो यह उसका भाग्य ही है, लेकिन ऐसा नहीं है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए भारत या वृंदावन में ही जन्म लेना जरूरी है। आप कहीं भी रहकर अगर भगवत भजन करते हैं, तो ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है।
इस बात को प्रेमानंद जी महाराज रामचरितमानस की एक चौपाई के माध्यम से समझाते हैं। वह चौपाई है- पुरुष नपुंसक नारि वा जीव चराचर कोइ, सर्ब भाव भज कपट तजि मोहि परम प्रिय सोइ। इसका मतलब यह है कि- कोई पुरुष हो, नपुंसक हो, स्त्री हो अथवा चर-अचर कोई भी जीव हो अगर वो कपट छोड़कर सर्वभाव से मुझे भजता है, वह मुझे परम प्रिय होता है॥ आप भारत में रहें या विदेश में, अगर भक्ति भाव से ईश्वर का ध्यान करते हैं और भजन करते हैं, तो ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
भारत में है सबसे ज्यादा भक्ति का माहौल
प्रेमानंद जी महाराज ये भी बताते हैं कि यह बात सच है कि किसी भी स्थान पर रहते हुए भक्ति की जा सकती है, लेकिन भगवत प्राप्ति का माहौल जैसा आपको भारत में मिलेगा वैसा विश्व में कहीं नहीं मिलेगा, विश्व में अन्य स्थानों पर भोग विलासिता की प्रधानता है।
वहीं आप चाहे इंग्लैंड के हों, अमेरिका या होलैंड के हों अगर हमारे भगवान का भजन करेंगे, तो जो भी भगवान का प्रिय पुत्र है वो भगवान को प्राप्त कर ही लेगा। वास्तव में देखा जाए तो विदेशों में भी अलग कहीं भगवत भजन का माहौल होता है तो वो हमारे देश के लोगों की वजह से ही होता है।
कैसे मिलता है भक्ति का मार्ग
प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति हमारे सिद्धांतों का पालन करे तो, वो कहीं भी रहते हुए भगवत प्राप्ति कर लेगा। अगर देखा जाए तो हजारों वैष्णव हैं चोटी धोती धारण करके माला नाम जप करते विदेशी देखने को मिलते हैं और वो हमसे ज्यादा वैष्णवता धारण करते हैं।
पवित्रता के भाव से उनको श्री कृष्ण अवश्य मिल जाएंगे। अगर भारत में जन्में लोग विदेशों की भोग वासना जनित बातें धारण करते हैं तो ईश्वर की प्राप्ति मुश्किल ही है। हम कहीं भी पैदा हुए हों, चाहे भगवान की ही भूमि में पैदा हुए हैं। हम कहीं भी रह रहे हों सर्वत्र भगवान हैं और हम भगवान के साथ ही रहते हैं। भजन करने से ही भगवान की प्राप्ति होती है।
अगर आप भी ईश्वर की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो जन्म किइस भी स्थान पर क्यों न हुआ हो आपको भगवत भजन और ध्यान से ही ईश्वर मिल सकते हैं।
यह भी पढ़ें- मंदिर के पत्थरों पर अपना नाम लिखवाना सही है या गलत? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया जवाब
यह भी पढ़ें- तीर्थ यात्रा के समय आपको किन नियमों का पालन करना चाहिए? प्रेमानंद जी से इस रहस्य को समझें
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
