Chaitra Navratri 2026: खरमास के साए में चैत्र नवरात्र, क्या वाकई फलदायी होगा व्रत? भूलकर भी न करें ये काम
चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) खरमास के दौरान पड़ रहे हैं, जिसे ज्योतिष में अशुभ माना जाता है। ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र से जुड़ी बातें। (Ai Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र की शुरुआत खरमास के साथ हो रही है। ज्योतिष शास्त्र में खरमास को अशुभ समय माना जाता है, जिसमें सूर्य की चाल धीमी पड़ जाती है और सभी मांगलिक कामों पर रोक लग जाती है। ऐसे में भक्तों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खरमास में मां दुर्गा की पूजा सफल होगी? क्या इस दौरान रखा गया व्रत फलदायी होगा? आइए जानते हैं इस दुर्लभ संयोग का सच और वे सावधानियां जो आपको इस दौरान बरतनी चाहिए।
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क्या कहता है शास्त्र?
शास्त्रों के अनुसार, खरमास के दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और जनेऊ जैसे काम वर्जित होते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से, गुरु की राशि में सूर्य के होने से गुरु की शुभता कम हो जाती है, जिससे मांगलिक काम रोक दिए जाते हैं, क्योंकि किसी भी मांगलिक काम के लिए गुरु का शुभ स्थिति में होना जरूरी होता है। लेकिन, जब बात शक्ति की उपासना यानी नवरात्र की आती है, तो नियम बदल जाते हैं।
नवरात्र अपने आप में एक सिद्ध और शुभ अवधि है, जिस पर खरमास का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। बल्कि, इस समय की गई पूजा-अर्चना और दान-पुण्य का फल दोगुना मिलता है। इसलिए, आप बिना किसी डर के व्रत रख सकते हैं और घटस्थापना कर सकते हैं।
भूलकर भी न करें ये काम (Chaitra Navratri 2026 Donts)
- नवरात्र होने के बावजूद, खरमास के दौरान नया कारोबार शुरू करने या बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने से बचना चाहिए।
- इस दौरान सगाई या शादी की तारीख पक्की न करें। इसे खरमास खत्म होने तक टाल दें।
- इस दौरान प्याज, लहसुन और मांस का सेवन न केवल धार्मिक बल्कि सेहत के लिहाज से भी नुकसानदेह होगा।
- इस दौरान किसी का अपमान गलती से भी न करें, वरना मां दुर्गा नाराज हो सकती हैं।
कैसे करें घटस्थापना?
इस बार नवरात्र खरमास के दौरान पड़ रहा है, इसलिए शुभ मुहूर्त का महत्व बढ़ जाता है। इस बार अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना सबसे ज्यादा अच्छा रहेगा। अगर आप खरमास के दोषों को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं, तो पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के साथ-साथ सूर्य देव को अर्घ्य देकर करें।
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