Chaitra Navratri से पहले जरूर करें वास्तु के ये उपाय, माता रानी के साथ होगा सुख-समृद्धि का आगमन
चैत्र नवरात्र की अवधि 19 मार्च से 27 मार्च तक रहने वाली है। चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri 2026) का पावन पर्व न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का समय है, बल् ...और पढ़ें
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चैत्र नवरात्र के वास्तु उपाय (AI Generated Image)
HighLights
19 से 27 मार्च तक रहेगी चैत्र नवरात्र की अवधि
माता रानी की कृपा के लिए खास है यह समय
वास्तु नियमों का ध्यान रखने से आती है सुख-समृद्धि
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माता रानी की कृपा प्राप्ति के लिए चैत्र नवरात्र की अवधि को विशेष माना जाता है। इस दौरान कलश स्थापना का भी विशेष महत्व है। अगर आप वास्तु नियमों का ध्यान रखते हुए चैत्र नवरात्र की तैयारियां करते हैं, तो इससे आपको अद्भुत परिणाम देखने को मिल सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही वास्तु उपाय बताने जा रहे हैं, जिनसे आप नवरात्र के दौरान लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
इस तरह करें तैयारी
- नवरात्र के दौरान घर की साज-सज्जा पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके लिए आप घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों से बनी बंदनवार या तोरण (Toran) लगा सकते हैं।
- यह न केवल घर की शोभा बढ़ाती है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को भी घर में प्रवेश करने से रोकती है और मंगल ऊर्जा का संचार करती है।
- पूजा घर की दीवारों पर हल्के पीले, गुलाबी या सफेद आदि रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए। ये रंग मानसिक शांति प्रदान करते और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते में मदद करते हैं।
- तामसिक रंगों जैसे काले, नीले और भूरे रंग का प्रयोग पूजा कक्ष में नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह रंग सकारात्मकता में बाधक बन सकते हैं।
- वास्तु के अनुसार, आपको अपने पूजन कक्ष को भी हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। इससे दिव्य शक्तियां आपके घर की ओर आकर्षित होती हैं।
कलश स्थापना की दिशा
हिंदू धर्म में कलश को सुख, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना जाता है। अगर आप वास्तु नियमों का ध्यान रखते हुए इसे स्थापित करते हैं, तो इससे वास्तु दोषों का प्रभाव कम होता है।
- वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को ईश्वर का स्थान माना गया है। यहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा होती है। ऐसे में आपको इसी दिशा में कलश की स्थापना करनी चाहिए।
- माता की प्रतिमा और अखंड ज्योत की स्थापना भी ईशान कोण में ही करनी चाहिए।
- एक पीतल के कलश में चावल भरकर उसे मंदिर के उत्तर-पूर्व हिस्से में रख सकते हैं। वास्तु के अनुसार, इस उपाय को करने से धन-धान्य में वृद्धि और घर में समृद्धि आती है।
- कलश स्थापना के दौरान समय मन में शुद्ध भाव रखें, ताकि आपको पूर्ण लाभ मिल सके।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।