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    Chaitra Navratri 2026 Day 4: मां कूष्मांडा पूजा में करें इस कथा का पाठ, जीवन में बनी रहेगी सुख-शांति

    Updated: Sun, 22 Mar 2026 09:12 AM (IST)

    चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इनकी पूजा और व्रत से मानसिक शांति मिलती है, परिवार में खुशियां आती ह ...और पढ़ें

    मां कूष्मांडा की कथा (AI Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 22 मार्च को चैत्र नवरात्र का चौथा (Chaitra Navratri 2026 Day 4) दिन है। यह दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कूष्मांडा की पूजा और व्रत करने से मानसिक शांति मिलती है और परिवार में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही सभी भय से मुक्ति मिलती है।

    मां कूष्मांडा की पूजा के दौरान कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और व्रत सफल होता है। आइए पढ़ते हैं मां कूष्मांडा की सम्पूर्ण कथा।

    मां कूष्मांडा कथा (Maa Kushmanda Katha in Hindi)

    पौराणिक कथा के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था और चारों तरफ अंधकार छा गया था। ब्रह्मांड में सन्नाटा पसरा हुआ था। तब त्रिदेव ने मां दुर्गा से सहायता ली। इसके बाद मां कूष्मांडा ने ब्रह्मांड की रचना की। मां कूष्मांडा की मुस्कान से ही ब्रह्मांड में प्रकाश हो गया। इसलिए मां दुर्गा के चौथे स्वरूप को मां कूष्मांडा कहा गया। धर्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्यमंडल के भीतर के लोक में मां कूष्मांडा का वास है। इसलिए पूजा के दौरान मां कुष्मांडा की व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है।

    मां कूष्मांडा देवी स्तोत्र

    वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

    सिंहरूढा अष्टभुजा कूष्मांडा यशस्वनीम्॥

    भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।

    कमण्डलु चाप, बाण, पदमसुधाकलश चक्र गदा जपवटीधराम्॥

    पटाम्बर परिधानां कमनीया कृदुहगस्या नानालंकार भूषिताम्।

    मंजीर हार केयूर किंकिण रत्‍‌नकुण्डल मण्डिताम्।

    प्रफुल्ल वदनां नारू चिकुकां कांत कपोलां तुंग कूचाम्।

    कोलांगी स्मेरमुखीं क्षीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम् ॥

    स्तोत्र

    दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्।

    जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

    जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।

    चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

    त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दु:ख शोक निवारिणाम्।

    परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

    मां कूष्मांडा के मंत्र -

    दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दारिद्रादि विनाशिनीम्।

    जयंदा धनदां कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

    जगन्माता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।

    चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

    त्रैलोक्यसुंदरी त्वंहि दु:ख शोक निवारिणाम्।

    परमानंदमयी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

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