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    चैत्र नवरात्र 2026: क्या नॉनवेज खाने वालों को रखना चाहिए व्रत? अभी जान लें शास्त्रों में क्या लिखा है

    Updated: Fri, 20 Mar 2026 06:20 PM (IST)

    क्या आप नॉनवेज खाते हैं और चैत्र नवरात्र 2026 का व्रत रखना चाहते हैं? जानें भगवद गीता और मनुस्मृति जैसे शास्त्रों के अनुसार मांसाहार और व्रत से जुड़े न ...और पढ़ें

    Chaitra Navratri 2026: व्रत से जुड़े नियम (Image Source: AI-Generated)

    Chaitra Navratri 2026: व्रत से जुड़े नियम (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र 2026 (Chaitra Navratri 2026) के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। अक्सर इस दौरान एक बड़ा सवाल उन लोगों के मन में उठता है जिनकी जीवनशैली में नॉनवेज (मांसाहार) शामिल है।

    क्या नॉनवेज खाने वाले लोग माता का व्रत रख सकते हैं? क्या शास्त्रों में उनके लिए कोई विशेष नियम या मनाही है? अक्सर लोग लोक-कथाओं और सुनी-सुनाई बातों के आधार पर डर जाते हैं, लेकिन धर्म और अध्यात्म का नजरिया थोड़ा अलग और गहरा है।

    क्या कहते हैं शास्त्र?

    हिंदू धर्म में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि मन और विचार बनाने वाला तत्व माना गया है।

    • भगवद गीता (अध्याय 17, श्लोक 8-10): यहां भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- सात्विक, राजसिक और तामसिक। मांस (नॉनवेज) को 'तामसिक' श्रेणी में रखा गया है। शास्त्रों के अनुसार, तामसिक भोजन आलस, क्रोध और अज्ञानता बढ़ाता है। जबकि, व्रत का उद्देश्य 'सात्विक' ऊर्जा को जगाना है।
    • मनुस्मृति (अध्याय 5): इसमें शुद्धता और अशुद्धता के नियमों का विस्तार से वर्णन है। शास्त्र कहते हैं कि आध्यात्मिक अनुष्ठान (जैसे व्रत) के दौरान शरीर और मन की शुद्धि अनिवार्य है।
    • मार्कण्डेय पुराण: नवरात्र की कथाओं और विधि में 'शौच' (शुद्धि) पर बहुत जोर दिया गया है। व्रत के नौ दिनों में अहिंसा का पालन करना सबसे बड़ा धर्म बताया गया है।

    तो क्या नॉनवेज खाने वाले व्रत नहीं रख सकते?

    शास्त्रों का कहना है कि व्यक्ति अपनी पुरानी आदतों को छोड़कर शुद्धि की ओर बढ़े। अगर आप साल भर नॉनवेज खाते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपके लिए भक्ति के दरवाजे बंद हैं। नवरात्र का व्रत तो बना ही इसलिए है ताकि आप अपनी 'तामसिक' प्रवृत्तियों पर लगाम लगा सकें।

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    (Image Source: AI-Generated)

    नवरात्र शुरू होने से कम से कम एक दिन पहले से और व्रत के पूरे नौ दिनों तक आपको मांस, मदिरा (शराब) और लहसुन-प्याज का पूरी तरह त्याग करना होगा। यह एक तरह का 'डिटॉक्स' है, शरीर के लिए भी और आत्मा के लिए भी।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।