चैत्र नवरात्र 2026: मां दुर्गा को भूलकर भी न चढ़ाएं ये फल, पढ़ें पूजा और भोग से जुड़े जरूरी नियम
चैत्र नवरात्र 2026 में मां दुर्गा की पूजा करते समय किन फलों को चढ़ाना वर्जित है? जानें शास्त्रों और पुराणों के अनुसार भोग लगाने की सही विधि और जरूरी सा ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026: भोग और व्रत के नियम (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेक्स, नई दिल्ली। अक्सर हम फल चढ़ाते समय बस यह देखते हैं कि फल ताजे हों, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार कुछ खास फल और तरीके ऐसे हैं, जिन्हें मां दुर्गा को चढ़ाना वर्जित माना गया है?
मां दुर्गा को शक्ति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, उनकी पूजा में तामसिक या अशुद्ध चीजों का कोई स्थान नहीं है।
- कभी भी ऐसे फल न चढ़ाएं जो कहीं से कटे हों या जिन्हें किसी पक्षी ने चोंच मारी हो। इसे 'अशुद्ध' माना जाता है।
- जो फल अपने आप पेड़ से टूटकर जमीन पर गिर जाते हैं, उन्हें शास्त्रों में पूजा के योग्य नहीं माना गया है।
- मां के सौम्य रूप की पूजा में नींबू (शांति पाठ के दौरान) या बहुत ज्यादा खट्टे और बेस्वाद फलों को चढ़ाने से बचना चाहिए।
- फल बाहर से सुंदर दिख सकते हैं, लेकिन उन्हें अच्छे से जांच लें। अगर अंदर कीड़ा है, तो वह भोग स्वीकार्य नहीं होता।
कहां लिखा है ऐसा?
हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों जैसे 'मार्कण्डेय पुराण' और 'देवी पुराण' में विस्तार से बताया गया है कि मां दुर्गा को क्या प्रिय है और क्या नहीं। इसके अलावा, 'आचार भूषण' जैसे ग्रंथों में भी पूजा की सामग्री की शुद्धि पर जोर दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, जो भोजन हम खुद नहीं खा सकते या जो अपवित्र है, उसे ईश्वर को अर्पित करना अपराध माना जाता है।

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भोग और व्रत के कुछ खास नियम
- मां को भोग हमेशा तांबे, चांदी, पीतल या मिट्टी के शुद्ध बर्तनों में ही लगाएं। प्लास्टिक या कांच के बर्तनों का प्रयोग पूजा में वर्जित है।
- अगर आप घर में हलवा-पूरी या खीर का भोग बना रहे हैं, तो ध्यान रहे कि उसमें नमक या लहसुन-प्याज का स्पर्श भी न हो।
- नवरात्र में कलश स्थापना के लिए जटा वाला नारियल ही उपयोग करें। अगर नारियल अंदर से खराब निकल जाए, तो घबराएं नहीं, उसे बहते जल में प्रवाहित कर मां से क्षमा मांग लें।
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