Chaitra Navratri 2026 Day 5: चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन करें स्कंदमाता की आरती, होगा कल्याण
चैत्र नवरात्र का पांचवा दिन (Chaitra Navratri 2026 Day 5) स्कंदमाता को समर्पित है। ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026 Day 5: स्कंदमाता की आरती। (Ai Generated Image)
HighLights
चैत्र नवरात्र का आज पांचवां दिन है
इस दिन स्कंदमाता की पूजा होती है
देवी की पूजा से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Chaitra Navratri 2026 Day 5: चैत्र नवरात्र का पावन पर्व बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन आदि-शक्ति के ममतामयी स्वरूप स्कंदमाता को समर्पित है, जो भगवान कार्तिकेय की माता हैं। यह दिन शिव और शक्ति की एक साथ कृपा पाने का पावन अवसर है। ऐसा माना जाता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से न केवल ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है, बल्कि संतान से जुड़ी मुश्किलें भी दूर होती हैं। आइए इस दिन देवी की कृपा पाने के लिए उनकी भव्य आरती करते हैं, जो इस प्रकार हैं -
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।।स्कंदमाता की आरती।।
जय तेरी हो स्कंद माता, पांचवा नाम तुम्हारा आता।
सब के मन की जानन हारी, जग जननी सब की महतारी।
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं, हरदम तुम्हे ध्याता रहूं मैं।
कई नामो से तुझे पुकारा, मुझे एक है तेरा सहारा।
कहीं पहाड़ों पर है डेरा, कई शहरों में तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे गुण गाये, तेरे भगत प्यारे भगति।
अपनी मुझे दिला दो शक्ति, मेरी बिगड़ी बना दो।
इन्दर आदी देवता मिल सारे, करे पुकार तुम्हारे द्वारे।
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये, तुम ही खंडा हाथ उठाये।
दासो को सदा बचाने आई, चमन की आस पुजाने आई।
।।आरती अम्बा जी।।
जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत,हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत,टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना,चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी
कनक समान कलेवर,रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला,कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत,खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत,तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी
कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर,सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना,निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी
चण्ड-मुण्ड संहारे,शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे,सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणीतुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी,तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी
चौंसठ योगिनी मंगल गावत,नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा,अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता,तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता,सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी
भुजा चार अति शोभित,वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत,सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत,अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत,कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
श्री अम्बेजी की आरती,जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी,सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी॥
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