Chaitra Navratri 2026 Day 5: आज है चैत्र नवरात्र का पांचवां दिन, एक क्लिक में जानें पूजा विधि से लेकर सबकुछ
चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन (Chaitra Navratri 2026 Day 5) स्कंदमाता की पूजा होती है। ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026 Day 5: चैत्र नवरात्र पूजा विधि। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Chaitra Navratri 2026 Day 5: आज चैत्र नवरात्र का पांचवां दिन है। यह दिन स्कंदमाता को समर्पित है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों को ममता, शक्ति और मोक्ष प्रदान करता है। स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं, इसलिए इन्हें यह नाम मिला। इनकी पूजा से संतान सुख और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

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कैसा है स्कंदमाता का स्वरूप? (Chaitra Navratri 2026 Day 5 Significance)
स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना भी कहते हैं। देवी की चार भुजाएं हैं। देवी की गोद में भगवान स्कंद बैठे हुए हैं। उनके दाहिने तरफ की नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर होते हैं। इसके साथ ही उन्हें संतान सुख मिलता है।
पूजा विधि (Chaitra Navratri 2026 Day 5 Puja Rituals)
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- लाल या पीले रंग के कपड़े पहनें।
- पूजा स्थल पर देवी की प्रतिमा स्थापित करें।
- हाथ में फूल और अक्षत लेकर व्रत या पूजा का संकल्प लें।
- मां स्कंदमाता की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं।
- मां को चुनरी, रोली, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप, गंध और सोलह शृंगार की सामग्री अर्पित करें।
- स्कंदमाता को पीले रंग के फूल विशेष रूप से कमल का फूल अति प्रिय है, इसलिए उन्हें कमल का फूल या अन्य पीले फूल चढ़ाएं।
- मां को केला, घर पर बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- मां के मंत्रों का जप करें और फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- अंत में स्कंदमाता की आरती करें और सभी में प्रसाद बांटें।
- इसके बाद पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
स्कंदमाता के भोग (Chaitra Navratri 2026 Day 5 Bhog)
स्कंदमाता को केले का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप उन्हें खीर, मिठाई, या मौसमी फल का भोग लगा सकते हैं।
पूजा मंत्र ( Chaitra Navratri 2026 Puja Mantra)
- ॐ देवी स्कंदमातायै नमः
- सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
- शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
- या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
- नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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