Chanakya Niti: कैसे हमारा भाग्य संवारती है 'अच्छी संगति', आचार्य चाणक्य ने कही है ये बात
आज हम आपको चाणक्य नीति के कुछ ऐसे श्लोक बताने जा रहे हैं, जो अच्छी संगति के महत्व पर प्रकाश डालते हैं। ...और पढ़ें
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चाणक्य ने बताया है संगति का महत्व
HighLights
चाणक्य नीति से मिलती है जीवन की सीख
चाणक्य ने बताया है संगति का महत्व
व्यक्ति को निखारती है अच्छी संगति
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चाणक्य नीति (Chanakya Niti), हमें बहुत-सी चीजें सीखाती है, जिन्हें अगर आप जीवन में उतार लेते हैं, तो काफी मुश्किलों का हल मिल सकता है। आज हम आपको चाणक्य नीति के कुछ श्लोकों के माध्यम से यह बताएंगे की अच्छी संगति आपके लिए क्यों जरूरी है।
1. दर्शनध्यानसंस्पर्शेर्मत्सी कूर्मी च पक्षिणी।
शिशुं पालयते नित्यं तथा सज्जनसंगतिः ।।
चाणक्य नीति का यह श्लोक कहता है कि जैसे मछली, कछुआ और पक्षी अपने बच्चों का पालन-पोषण क्रमशः देखकर यानी दर्शन, ध्यान यानी मनन और स्पर्श यानी संपर्क से करते हैं, ठीक उसी प्रकार सज्जनों की संगति में रहने वाला व्यक्ति भी इन तीन तरीकों को अपनाकर अपने आप को विकसित करता है और निखरता जाता है।

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2. कह कालहा का च में शक्ति को देश कौ व्ययागमौ।
कश्चाहम् का च मे शक्तिः इति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः।
चाणक्य के अनुसार, वर्तमान स्थिति क्या है, मेरे मित्र कौन हैं, मैं जिस देश में रहता हूं, वहां की स्थिति क्या है, क्या मेरी आय और व्यय संतुलित हैं, मेरी वर्तमान स्थिति क्या है और मैं कितना सक्षम और शक्तिशाली हूं, इन सभी पहलुओं को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए और उसी के अनुसार उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
जो व्यक्ति इन 6 पहलुओं का बार-बार विश्लेषण करता है, वह कभी भी जीवन में असफल नहीं होता और सही समय पर सही निर्णय लेता है। क्योंकि यही सब चीजें आपकी संगति भी तय करती हैं।
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3. "विषादप्यमृतं ग्राह्यममेध्यादपि काञ्चनम्।
नीचादप्युत्तमां विद्यां स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि।।"
इस श्लोक में आचार्य चाणक्य (Acharya Chanakya niti) कहते हैं कि जहरीली चीज से यदि अमृत मिले या फिर गंदी जगह से यदि सोना मिले, तो उसे ले लेना चाहिए। इसी तरह ज्ञान जहां से भी मिले वहीं से ले लेना चाहिए। क्योंकि ज्ञान का स्रोत मायने नहीं रखता, उसकी उपयोगिता और गुणवत्ता मायने रखती है।
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