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    Chanakya Niti: सफलता प्राप्ति के लिए मन से निकाल दें इन चीजों का डर, मानें चाणक्य की यह सलाह

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Sat, 07 Mar 2026 05:50 PM (GMT+05:30)

    आचार्य चाणक्य एक शिक्षक, अर्थशास्त्री और राजनीतिक सलाहकार थे। उन्हें कौटिल्य या विष्णु गुप्ता के नाम से भी जाना जाता है। आचार्य चाणक्य (Acharya Chanak ...और पढ़ें

    सफलता प्राप्ति के लिए चाणक्य के टिप्स  (AI Image)

    सफलता प्राप्ति के लिए चाणक्य के टिप्स (AI Image)

    HighLights

    1. चुनौतियों का सामना करने की हिम्मत देती है चाणक्य नीति

    2. जीवन में इन चीजों का त्याग करने से कभी डरें नहीं

    3. सफलता प्राप्ति के लिए जीवन में आने वाली परीक्षा से न घबराएं

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर व्यक्ति के जीवन में कोई-न-कोई डर होता है, जो उसे आगे बढ़ने से रोकता है। आज हम आपको चाणक्य नीति (chanakya niti tips in Hindi) में बताई गईं कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं कि जिनका डर व्यक्ति को अपने मन से निकाल देना चाहिए। तभी वह जीवन में सफलता हासिल कर सकता है।

    1. कस्य दोषः कुले नास्ति व्याधिना को न पीडितः।
    व्यसनं केन न प्राप्तं कस्य सौख्यं निरन्तरम् ॥

    चाणक्य नीति का यह श्लोक जीवन की सच्चाइयों को दर्शाता है। इस श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य कहते हैं कि किस व्यक्ति के कुल में दोष नहीं होता? रोग किसे दुखी नहीं करते? दुःख किसे नहीं मिलता। इस दुनिया में निरंतर सुखी कोई नहीं रहता। ऐसे में व्यक्ति को अपने दुखों से विचलित न होकर, संघर्ष को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

    chanakya AI

    (AI Generated Image)

    2. त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्।
    ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥

    इस श्लोक का भावार्थ है कि व्यक्ति को चाहिए की कुल के लिए एक व्यक्ति को त्याग दे, ग्राम (गांव) के लिए कुल को त्याग दे। राज्य की रक्षा के लिए ग्राम को और आत्मरक्षा के लिए संसार को भी त्याग देना चाहिए। चाणक्य इस श्लोक में कहते हैं कि किसी व्यक्ति से बढ़कर राष्ट्र व धर्म की रक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और इसके लिए त्याग करने से डरना नहीं चाहिए।

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    (Picture Credit: Freepik) (AI Image)

    3. यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निर्घषणच्छेदन तापताडनैः।
    तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा॥

    इस श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि जिस प्रकार घिसने, काटने, तापने और पीटने से सोने का परीक्षण होता है, ठीक उसी प्रकार त्याग, शील, गुण, एवं कर्मों से पुरुष की परीक्षा होती है। ऐसे में इस तरह की परीक्षा से व्यक्ति को घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि यह परीक्षा व्यक्ति के चरित्र की परख के लिए महत्वपूर्ण मानी गई हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।